चीनी मूल के साइबर खतरों पर सेना की नजर, 6 AASHVAST लैब होंगी तैयार; ड्रोन से CCTV तक होगी जांच

नई दिल्ली। भारतीय सेना विदेशी मूल के साइबर खतरों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर अपनी तैयारियां मजबूत कर रही है। इसके तहत सेना देशभर में 6 AASHVAST (आश्वस्त) प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बना रही है। इन लैब्स में ड्रोन और अन्य सैन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में मौजूद साइबर कमजोरियों की पहचान की जाएगी।

दिल्ली में एक AASHVAST लैब पहले ही शुरू हो चुकी है, जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच और लैब स्थापित करने की योजना है। शुरुआती चरण में इनका फोकस सैन्य ड्रोनों पर रहेगा। इसके बाद सेना द्वारा खरीदे जाने वाले CCTV कैमरों को भी सुरक्षा जांच के दायरे में लाया जाएगा।

फर्मवेयर और छिपे कोड की होगी जांच

AASHVAST सिस्टम को क्विकपे प्राइवेट लिमिटेड ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स महानिदेशालय के लिए विकसित किया है। यह सिस्टम केवल उपकरणों के हार्डवेयर की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम का भी विश्लेषण करेगा।

इसमें खराब कोड, छिपे हुए कमांड, बैकडोर, एम्बेडेड पासवर्ड, एन्क्रिप्शन कुंजी और रिमोट एक्सेस टूल जैसी संभावित कमजोरियों की पहचान की जा सकेगी। सिस्टम करीब 14 प्रकार की कमजोरियों का पता लगाने में सक्षम बताया गया है। इनमें लोकेशन या समय आधारित ऐसी गड़बड़ियां भी शामिल हैं, जो किसी विशेष परिस्थिति में ड्रोन के संचालन को प्रभावित कर सकती हैं।

चीनी मूल के पुर्जों को लेकर बढ़ी सतर्कता

सैन्य उपकरणों में विदेशी, खासकर चीनी मूल के पुर्जों और तकनीक को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रही हैं। सेना पहले ही घरेलू सैन्य ड्रोन निर्माताओं को चीनी मूल के कंपोनेंट्स के इस्तेमाल को सीमित करने के निर्देश दे चुकी है।

2025 में आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने रक्षा मंत्रालय को यूएवी से जुड़े साइबर जोखिमों को कम करने के लिए एक फ्रेमवर्क भी सौंपा था। AASHVAST लैब्स इसी सुरक्षा प्रक्रिया को और मजबूत करने की दिशा में एक अतिरिक्त व्यवस्था के तौर पर काम करेंगी।

CCTV कैमरों की भी होगी स्क्रीनिंग

आने वाले समय में सेना द्वारा खरीदे जाने वाले CCTV कैमरों की भी साइबर सुरक्षा जांच की जाएगी। इसमें प्रॉप्राइटरी प्रोटोकॉल और एम्बेडेड तकनीक से जुड़ी संभावित कमजोरियों की जांच की जाएगी।

सेना का यह कदम आधुनिक युद्ध में बढ़ती साइबर चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ड्रोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सैन्य प्रणालियों में मौजूद किसी छिपे हुए कोड या बैकडोर का इस्तेमाल दूर से सिस्टम को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे में हार्डवेयर के साथ-साथ सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर की सुरक्षा जांच पर भी जोर दिया जा रहा है।

AASHVAST लैब्स के जरिए सैन्य उपकरणों की तकनीकी जांच और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे बाहरी हस्तक्षेप के संभावित जोखिमों को कम किया जा सके।

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