नई दिल्ली। UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की खबरों के बीच आम यूजर्स के बीच चिंता बढ़ गई है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अभी अंतिम रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। भुगतान प्रणाली से जुड़े प्रस्ताव पर सरकार और संबंधित पक्षों के बीच विचार-विमर्श जारी है।
RBI गवर्नर ने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली में आने वाली लागत का वहन अंततः किसी न किसी पक्ष को करना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि RBI का फोकस UPI को अधिक से अधिक अपनाने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर है।
₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या होगा?
UPI से जुड़े प्रस्ताव को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि ₹2,000 से अधिक के हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगाया जाएगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रस्ताव मर्चेंट यानी व्यापारियों से जुड़े लेनदेन पर केंद्रित है।
इसका मतलब है कि आम ग्राहक अगर किसी दुकान, सर्विस प्रोवाइडर या अन्य व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करता है, तो उसके ऊपर सीधे MDR शुल्क लगाने की बात नहीं है। रोजमर्रा की खरीदारी जैसे दूध, सब्जी, किराना, ऑटो या टैक्सी भुगतान करने वाले आम यूजर्स पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
MDR चार्ज क्या होता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों से भुगतान प्रणाली में शामिल बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर ले सकते हैं। यह शुल्क आम तौर पर व्यापारी और भुगतान व्यवस्था के बीच का मामला होता है।
UPI को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 से UPI पर MDR को लेकर मौजूदा व्यवस्था में शुल्क नहीं लिया जा रहा था। सरकार की ओर से डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए इस व्यवस्था को जारी रखा गया।
95 फीसदी से ज्यादा लेनदेन छोटे भुगतान
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार UPI पर होने वाले अधिकांश लेनदेन ₹2,000 से कम के होते हैं। बताया गया है कि करीब 95 फीसदी लेनदेन ₹2,000 की सीमा से नीचे होते हैं, जबकि लगभग 5 फीसदी लेनदेन ही इससे अधिक होते हैं।
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में भी चर्चा मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन को लेकर है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन को इससे अलग रखा जा सकता है।
आम UPI यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं
फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए कोई तत्काल बदलाव नहीं है। ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करने पर ग्राहक से सीधे MDR वसूले जाने की बात स्पष्ट नहीं हुई है। इस संबंध में अंतिम नियम और शुल्क व्यवस्था सरकार की ओर से प्रस्ताव पर चल रहे विचार-विमर्श के बाद ही साफ होगी।
ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों से सावधान रहने की जरूरत है, जिनमें कहा जा रहा है कि अब हर UPI यूजर को ₹2,000 से ज्यादा भुगतान करने पर चार्ज देना होगा।
UPI को बढ़ावा देना RBI की प्राथमिकता
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि डिजिटल पेमेंट को लेकर नीतिगत बदलावों पर सावधानीपूर्वक विचार किया जा रहा है। UPI ने छोटे-मोटे लेनदेन के लिए नकदी की जरूरत को काफी कम किया है और देश में डिजिटल भुगतान को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया है।
इसलिए फिलहाल UPI यूजर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR से जुड़ा प्रस्ताव मुख्य रूप से मर्चेंट लेनदेन से संबंधित है और आम ग्राहकों से सीधे शुल्क वसूली की कोई अंतिम व्यवस्था अभी स्पष्ट नहीं हुई है।