रिलायंस कैपिटल पर CBI का शिकंजा, करोड़ों के निवेश घोटाले की जांच शुरू, अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, कंपनी के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ कथित 1,816.22 करोड़ रुपये के EPFO निवेश घोटाले में मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की शिकायत के आधार पर की गई है।

CBI के अनुसार, इस मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी का आरोप है कि कथित अनियमितताओं के कारण करीब 1,007.55 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि इस पर 808.67 करोड़ रुपये की ब्याज देनदारी भी जुड़ गई।

2013-14 में EPFO ने किया था निवेश

जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी किए थे। इनमें EPFO ने चार पोर्टफोलियो मैनेजरों के माध्यम से करीब 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

इन डिबेंचरों की मैच्योरिटी 2023 और 2024 में होनी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निवेश की गई राशि का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल और दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया, जिसके चलते कंपनी निवेश की राशि का भुगतान नहीं कर सकी।

CBI करेगी पूरे मामले की जांच

CBI ने कहा है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कथित साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे और निवेश की गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।

एजेंसी सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों समेत सभी संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करेगी।

रिलायंस समूह से जुड़े मामलों में पहले भी कार्रवाई

CBI ने बताया कि इससे पहले भी रिलायंस समूह की कई कंपनियों जैसे रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) के खिलाफ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और LIC की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

CBI के अनुसार, रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों में अब तक चार चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और सात आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है। एजेंसी ने कहा कि सभी मामलों की जांच निष्पक्ष और व्यापक तरीके से जारी है।

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