धर्म डेस्क । हिंदू धर्म में हरतालिका तीज व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना से यह निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की कामना के लिए व्रत करती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
14 सितंबर को रखा जाएगा व्रत
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।
15 सितंबर को होगा व्रत का पारण
हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन यानी चतुर्थी तिथि की सुबह पारण के साथ पूरा किया जाता है। इस वर्ष व्रत का पारण 15 सितंबर की सुबह किया जाएगा। मान्यता के अनुसार, स्नान और पूजा-अर्चना के बाद व्रत खोलना चाहिए। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है।
ऐसे करें हरतालिका तीज व्रत का पारण
पारण से पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। इस दौरान शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप कर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करें।
पूजा के बाद सात्विक चीजों का भोग लगाएं। यदि शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाई गई हैं, तो परंपरा के अनुसार उनका विसर्जन पवित्र नदी में किया जा सकता है या किसी उचित स्थान पर रखा जा सकता है।
व्रत खोलने से पहले किसी सुहागिन महिला को सुहाग सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी और सिंदूर का दान करने की परंपरा भी बताई गई है। इसके बाद फल या सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण किया जा सकता है।
अस्वीकरण: इस खबर में दी गई धार्मिक मान्यताएं, विधियां और लाभ सामान्य जानकारी पर आधारित हैं। इन्हें अंतिम सत्य या वैज्ञानिक दावा न माना जाए। अलग-अलग पंचांग, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं में अंतर हो सकता है। किसी विशेष धार्मिक विधि के लिए स्थानीय विद्वान या पुरोहित की सलाह लेना उचित है।