डेस्क: बारिश के मौसम में घर की दीवारों पर सीलन, काले-पीले दाग, पेंट का उखड़ना और फफूंदी जमना आम समस्या है। लेकिन कई बार यह समझना मुश्किल होता है कि नमी दीवार के अंदर से आ रही है या कमरे में ज्यादा नमी होने के कारण सतह गीली हो रही है। ऐसे में बिना किसी महंगे उपकरण के एल्युमिनियम फॉयल की मदद से एक आसान घरेलू टेस्ट किया जा सकता है।
एल्युमिनियम फॉयल से ऐसे करें जांच
इस घरेलू टेस्ट के लिए एल्युमिनियम फॉयल और टेप की जरूरत होगी। सबसे पहले जिस हिस्से में सीलन का शक है, उसे सूखे कपड़े से अच्छी तरह साफ करें। दीवार पर मौजूद धूल और सतह की नमी को हटा दें। टेस्ट से पहले दीवार का सूखा होना जरूरी है।
इसके बाद एल्युमिनियम फॉयल का एक टुकड़ा लें और उसे सीलन वाले हिस्से पर सपाट तरीके से चिपका दें। फॉयल और दीवार के बीच ज्यादा जगह नहीं होनी चाहिए। अब टेप की मदद से फॉयल के चारों किनारों को अच्छी तरह सील कर दें, ताकि कमरे की हवा अंदर न जा सके।

48 घंटे बाद देखें नतीजा
फॉयल को करीब 48 घंटे तक उसी जगह लगा रहने दें। इस दौरान उसे हटाने या छेड़ने से बचें। तय समय के बाद फॉयल को सावधानी से हटाकर उसकी दोनों सतहों को ध्यान से देखें।
अगर फॉयल की दीवार वाली तरफ नमी या पानी की बूंदें दिखाई देती हैं, तो यह दीवार के अंदर से आने वाली नमी का संकेत हो सकता है। वहीं, अगर कमरे की तरफ वाली सतह पर नमी जमा होती है, तो इसकी वजह कमरे की हवा में मौजूद ज्यादा नमी या कंडेनसेशन हो सकती है।

सीलन का कारण हमेशा पाइप लीकेज नहीं
कई बार खराब वेंटिलेशन, बंद कमरे और ज्यादा आर्द्रता के कारण भी दीवारों पर नमी और फफूंदी दिखाई देने लगती है। इसलिए सीलन देखते ही पाइपलाइन लीकेज मान लेना सही नहीं है। समस्या के वास्तविक कारण की पहचान करना जरूरी है।
लगातार सीलन हो तो विशेषज्ञ से कराएं जांच
दीवार में लंबे समय तक नमी रहने से पेंट खराब होने, प्लास्टर उखड़ने और फफूंदी बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर दीवार बार-बार गीली हो रही है या सीलन लगातार लौट रही है, तो प्लंबर, वाटरप्रूफिंग एक्सपर्ट या योग्य पेशेवर से जांच करवाना बेहतर है।
ध्यान दें: एल्युमिनियम फॉयल का यह तरीका केवल शुरुआती अंदाजा लगाने के लिए है। इससे नमी के स्रोत की निश्चित पहचान नहीं होती। गंभीर या लगातार बनी रहने वाली सीलन के लिए विशेषज्ञ की जांच जरूरी हो सकती है।