छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य पावर कंपनी ने पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं के जरिए लगभग 13 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत जलाशयों का बेहतर उपयोग कर बिजली उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
बस्तर में पहली बार बड़ी ऊर्जा परियोजनाएं
इस योजना का सबसे अहम पहलू बस्तर क्षेत्र का शामिल होना है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने के बाद यहां विकास परियोजनाओं को गति दी जा रही है। बस्तर के तीन जिलों में मौजूद 9 जलाशयों को चिन्हित किया गया है, जहां लगभग 5700 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी है। प्रारंभिक सर्वे पूरा हो चुका है और अब मानसून के आंकड़ों के आधार पर डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार की जाएगी।
जशपुर और अन्य जिलों में भी बड़े प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में भी दो प्रमुख परियोजनाओं की योजना है, जिनकी कुल क्षमता करीब 3500 मेगावाट होगी। इसके अलावा कोरबा, गरियाबंद, बलरामपुर सहित अन्य जिलों में भी पंप स्टोरेज आधारित संयंत्र विकसित किए जाएंगे। कुल मिलाकर इन जिलों में 8300 मेगावाट से अधिक क्षमता की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
प्रमुख परियोजनाओं का खाका
योजना के तहत कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं—
- कोरबा के हसदेव बांगो में 800 मेगावाट
- गरियाबंद के सिकासेर बांध में 1200 मेगावाट
- कुरुंड में 1000 मेगावाट
- जशपुर के डांगरी में 1400 मेगावाट
- रौनी में 2100 मेगावाट
- बलरामपुर के कोटापाली में 1800 मेगावाट
बढ़ती बिजली मांग के बीच रणनीति
प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इस साल गर्मियों में अधिकतम मांग करीब 7300 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, और आने वाले वर्षों में यह 8000 मेगावाट से अधिक होने की संभावना है। ऐसे में इन परियोजनाओं को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंप स्टोरेज तकनीक से उत्पादन
पावर कंपनी के प्रबंध निदेशक संजीव कटियार के अनुसार, पंप स्टोरेज तकनीक के तहत पानी को ऊपरी जलाशय में संग्रहित कर जरूरत के समय नीचे छोड़कर बिजली पैदा की जाएगी। यह मॉडल न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव
यदि ये सभी परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख जल-ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है। सरकार का लक्ष्य सतत और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है, ताकि भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।