दुर्ग | 29 अप्रैल। छत्तीसगढ़ी भाषा को जनगणना में उचित स्थान दिलाने की मांग अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती जा रही है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने भारत सरकार द्वारा जारी ‘स्व-जनगणना पोर्टल’ (Self-Enumeration Portal) में छत्तीसगढ़ी भाषा का विकल्प न होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। सोमवार को पार्टी के पदाधिकारियों ने दुर्ग जिला कलेक्टर के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

विदेशी भाषाओं को जगह, पर छत्तीसगढ़ी को क्यों नहीं?
ज्ञापन में पार्टी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पोर्टल में मातृभाषा के कॉलम में नेपाली जैसी विदेशी भाषा और अंग्रेजी का उल्लेख तो मौजूद है, लेकिन छत्तीसगढ़ की अस्मिता ‘छत्तीसगढ़ी भाषा’ को गायब रखा गया है। पदाधिकारियों ने इसे साढ़े तीन करोड़ छत्तीसगढ़ी भाषियों के साथ अन्याय और उनके अस्तित्व को नजरअंदाज करने वाला कदम बताया है।
राजभाषा का दर्जा होने के बाद भी उपेक्षा
पार्टी के पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि 28 नवंबर 2007 को छत्तीसगढ़ शासन ने छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिया था और इसके लिए राजभाषा आयोग का गठन भी किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि जनगणना पोर्टल में छत्तीसगढ़ी का विकल्प नहीं दिया गया, तो वास्तविक भाषायी आंकड़े कभी सामने नहीं आ पाएंगे, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और भाषायी पहचान को नुकसान पहुंचेगा।
लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने प्रशासन और निर्वाचन आयोग को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पोर्टल में सुधार कर छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल नहीं किया गया, तो पार्टी पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगी।