निजी स्कूलों की लूट पर अभिभावकों का हल्लाबोल; कलेक्टर से गुहार— “शिक्षा को व्यापार बनाना बंद करें स्कूल”

दुर्ग | 29 अप्रैल। दुर्ग जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर अभिभावकों का धैर्य जवाब दे गया है। भारी संख्या में अभिभावकों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर जनदर्शन के माध्यम से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और निजी स्कूलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अभिभावकों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा देने के बजाय इसे ‘व्यवसाय’ में बदल चुके हैं।

सालाना 10 से 12 हजार का अतिरिक्त बोझ

ज्ञापन में बताया गया कि निजी स्कूल हर साल बिना किसी ठोस कारण के मासिक फीस में 700 से 1000 रुपये तक की वृद्धि कर रहे हैं। इस हिसाब से सालभर में एक बच्चे पर 10 से 12 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यह राशि कई छोटे स्कूलों की कुल सालाना फीस के बराबर है, जो मध्यम और गरीब वर्ग की कमर तोड़ रही है।

“नो स्कूल, नो फीस” की मांग

अभिभावकों ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान वसूली जाने वाली फीस पर भी कड़ा एतराज जताया है। उनका आरोप है कि स्कूल बंद रहने के बावजूद तीन महीने की पूरी ट्यूशन फीस और यहाँ तक कि ट्रांसपोर्ट फीस भी वसूली जा रही है। उन्होंने प्रशासन से “नो स्कूल, नो फीस” का नियम सख्ती से लागू करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री तक पहुँचा मामला

इस गंभीर मुद्दे को जनदर्शन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के संज्ञान में भी लाया गया है। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है।

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