वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में ऐतिहासिक पहल, सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

दुर्ग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का 29 जुलाई को सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के चतुर्थ तल स्थित नवीन सभागार में आयोजित समापन समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मार्गदर्शन तथा माननीय न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर की प्रेरणादायी संकल्पना के अनुरूप आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्तर पर छोटे-मोटे विवादों का संवाद एवं मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण समाधान कर “वाद-मुक्त ग्रामीण भारत” के संकल्प को साकार करना है।

25 से 29 जुलाई तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में दुर्ग जिले के घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल ग्रामों से चयनित कम्यूनिटी मीडियेटर्स ने उत्साह एवं समर्पण के साथ सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, मध्यस्थता के मूल सिद्धांत, प्रभावी संवाद कौशल, सक्रिय श्रवण, विवाद विश्लेषण, व्यवहारिक मध्यस्थता तकनीक, नैतिक मूल्यों तथा ग्राम स्तर पर विवादों के शांतिपूर्ण निराकरण से संबंधित विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने समूह चर्चा, भूमिका निर्वहन (Role Play) तथा विभिन्न व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से मध्यस्थता की बारीकियों को समझा।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के सतत मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण के संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने बताया कि प्रशिक्षित कम्यूनिटी मीडियेटर्स अपने-अपने ग्रामों में सामाजिक, पारिवारिक एवं सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले छोटे-छोटे विवादों के सौहार्दपूर्ण एवं प्रभावी समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शांति, सद्भाव एवं संवाद की संस्कृति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

समापन अवसर पर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी कम्यूनिटी मीडियेटर्स को स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत की अध्यक्षा सुषमा लकड़ा एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह प्रमाण-पत्र उनके प्रशिक्षण पूर्ण करने के साथ-साथ समाज में शांति, संवाद एवं सामाजिक समरसता के संवाहक के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी का प्रतीक रहा।

कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए गठित समन्वय समिति में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत की अध्यक्षा सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, सचिव उमेश कुमार भागवतकर, व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) मुस्कान शर्मा एवं पंकज शर्मा शामिल रहे। समिति द्वारा प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियों के समन्वय, सुचारू संचालन एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा इस पहल के लिए मल्टी-सेक्टोरल एप्रोच अपनाते हुए विभिन्न विभागों, विधि महाविद्यालयों, पैरालीगल वालंटियर्स, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया गया। जिला अधिवक्ता संघ, दुर्ग का भी कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन के साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने वाद-मुक्त, शांतिपूर्ण एवं सामाजिक रूप से समरस ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों से सामुदायिक मध्यस्थता की यह पहल भविष्य में सामाजिक परिवर्तन की प्रभावी एवं अनुकरणीय मिसाल बनेगी।

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