जामुल में कांग्रेस ने फूंका चुनावी बिगुल, भूपेश बघेल बोले- बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करें कार्यकर्ता

दुर्ग : दुर्ग जिले में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। जामुल नगर पालिका में कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों का आगाज करते हुए कार्यकर्ता बैठक आयोजित की। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं पर्यवेक्षक प्रमोद दुबे भी मौजूद रहे। बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जामुल पहुंचने पर युवाओं ने बाइक रैली निकालकर उनका जोरदार स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी के साथ उनका अभिनंदन किया। इसके बाद आयोजित बैठक में बघेल ने कार्यकर्ताओं को नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने के लिए जरूरी रणनीति और टिप्स भी दिए।

जामुल से कांग्रेस ने शुरू किया चुनावी अभियान

भूपेश बघेल ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव दिसंबर में होने जा रहे हैं और कांग्रेस ने जामुल से इसकी शुरुआत कर दी है। उन्होंने दावा किया कि जामुल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और जनता भी बदलाव के मूड में है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरने की अपील की।

भाजपा सरकार पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर महंगाई, कानून व्यवस्था और विकास के मुद्दे को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता सरकार से परेशान है और इस बार नगरीय निकाय चुनाव में परिवर्तन की संभावना है। बघेल ने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाने की बात कही।

चिराग पासवान को लेकर भी दिया बयान

चिराग पासवान को लेकर पूछे गए सवाल पर भूपेश बघेल ने कहा कि पहले उन्हें चुनाव में उतरने तो दीजिए। वहीं एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की। बघेल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार चुनाव आयुक्त नहीं, बल्कि चुनाव अभियुक्त हैं। उन्होंने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या जेल जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस मामले में असली अपराधी कोई और है।

जामुल में आयोजित इस बैठक को कांग्रेस की ओर से आगामी नगरीय निकाय चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने की अहम शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

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