‘नफरत के खिलाफ, न्याय के साथ’, राहुल गांधी के दो साल पर कांग्रेस का संकल्प

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में दो वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका संकल्प जनता की आवाज को संसद और सत्ता के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संविधान की रक्षा, युवाओं के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए संदेश में कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में बीता हर दिन आम लोगों की समस्याओं और उनकी आवाज को संसद तक पहुंचाने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने लिखा कि देश के अंतिम व्यक्ति की बात को भी सत्ता के गलियारों तक मजबूती से पहुंचाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी रही है।

उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़े विवाद, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और संविधान की रक्षा जैसे जनहित के मुद्दों को लगातार उठाया। राहुल गांधी ने कहा कि वह पहले भी जनता के अधिकारों की लड़ाई का हिस्सा थे, वर्तमान में भी हैं और भविष्य में भी सड़क से संसद तक लोगों के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “मंजिल अभी दूर है, लेकिन संकल्प अटल है।”

राहुल गांधी जून 2024 में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने थे। करीब एक दशक बाद यह पद भरा गया था, क्योंकि 16वीं और 17वीं लोकसभा में किसी भी विपक्षी दल के पास आवश्यक संख्या बल नहीं था। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतकर नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए आवश्यक संख्या हासिल की, जिसके बाद राहुल गांधी को यह संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई।

संसदीय राजनीति में वर्ष 2004 से सक्रिय राहुल गांधी के लिए यह पहला संवैधानिक पद है। इसके साथ ही वह नेहरू-गांधी परिवार के तीसरे सदस्य बने, जिन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उनसे पहले सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी इस पद पर रह चुके हैं।

कांग्रेस ने राहुल गांधी के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनके संदेश को साझा करते हुए इसे लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

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