अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर लगातार देखा जा रहा है। बुधवार को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुख जारी रहा, जिससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान के तेल निर्यात पर संभावित सख्ती की आशंकाओं के चलते आपूर्ति प्रभावित होने का डर गहरा गया है। इसी कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 100 डॉलर के करीब कारोबार करता दिखा। हालांकि कारोबार के दौरान दोनों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका की ओर से ईरान के शिपिंग और ऊर्जा निर्यात पर लंबे समय तक प्रतिबंध लगाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
घरेलू वायदा बाजार में इसके उलट हल्की नरमी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चा तेल गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया और इसमें करीब 84 रुपये प्रति बैरल की कमी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी हुई है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर डाल सकती है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।