मध्य प्रदेश में लंपी का खतरा बढ़ा: मवेशियों के लिए कितना घातक?

मध्य प्रदेश : शहडोल के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों लंपी वायरस ने मवेशियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। बीमारी के चलते पशुओं के शरीर पर दर्दभरी गांठें, सूजन और फोड़े उभर आते हैं, जिनसे धीरे-धीरे घाव बनने लगते हैं। संक्रमित मवेशी खाना छोड़ देते हैं और लगातार बुखार में रहकर कमजोर होते जाते हैं। बीमारी की तीव्रता इतनी अधिक है कि गांवों में हर तरफ प्रभावित गौवंश दिखाई देने लगे हैं, जिससे पशुपालकों की चिंता और बढ़ गई है।

गांवों में तेजी से फैल रहा संक्रमण

शहडोल मुख्यालय से करीब 10–15 किलोमीटर दूर खम्हरिया कला के किसान और पशुपालक राजेंद्र गौतम बताते हैं कि कुछ ही दिनों में उनके गौवंश पर वायरस का हमला अचानक बढ़ गया। उनकी एक बछिया तो बीमारी की चपेट में आकर मर भी गई। शुरुआत में उन्हें इस संक्रमण का अंदाजा नहीं था, लेकिन जैसे ही तीन और मवेशी बीमार पड़े, उन्होंने तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क किया और उपचार शुरू कराया। समय पर दवा मिलने से बाकी मवेशी ठीक हो गए। उन्होंने सभी पशुओं का टीकाकरण भी करवाया है।

राजेंद्र के अनुसार, क्षेत्र के कई गांवों में हाल के हफ्तों में लंपी वायरस के मामलों में तेजी आई है। तीन साल पहले भी यह वायरस गांव में फैल चुका था। अगर एक-दो पशु संक्रमित हो जाएं, तो धीरे-धीरे पूरी टोली इसमें फंस जाती है। बीमारी की शुरुआत बुखार, भूख में कमी और शरीर पर छोटे फोड़े जैसी गांठों से होती है, जो आगे चलकर बड़े घाव बन जाती हैं।

शहडोल में क्या है स्थिति?

शहडोल संभाग, जो छत्तीसगढ़ सीमा से सटा इलाका है, इस समय लंपी संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है। स्थानीय पशुपालन विभाग के उपसंचालक अशोक कुमार सिंह के मुताबिक सितंबर–अक्टूबर में सबसे ज्यादा केस सामने आए थे, हालांकि नवंबर में स्थिति काफी हद तक नियंत्रित कर ली गई है। उन्होंने बताया कि यह एक वायरल स्किन डिजीज है, जो पशुओं को शारीरिक रूप से बेहद कमजोर कर देती है।

लंपी वायरस के लक्षण

डॉ. सिंह के अनुसार—

  • पशु के शरीर पर कई जगह कठोर गांठें बन जाती हैं
  • तेज बुखार और मुंह से लार टपकना
  • चारा खाने से इंकार

शरीर में दर्द और कमजोरी

सही समय पर इलाज मिलने पर पशु 3–5 दिन में ठीक होने लगता है। एंटीबायोटिक और बुखार की दवाएं इसमें काफी कारगर साबित होती हैं। खतरनाक स्थिति तब होती है जब ये गांठें फटने लगती हैं और घाव पूरे शरीर में फैल जाते हैं।

बीमारी कैसे फैलती है?

विशेषज्ञ बताते हैं कि यह वायरस हवा, संक्रमित पशु के सीधे संपर्क और मच्छर या किलनी जैसे खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए तेजी से फैलता है। इसलिए बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही पशु को बाकी मवेशियों से अलग रखना चाहिए, ताकि संक्रमण आगे न बढ़े।

बचाव कैसे करें?

  • पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएं
  • बीमारी के संकेत मिलते ही नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें
  • संक्रमित पशु को अलग रखें

साफ-सफाई और मच्छर/किलनी नियंत्रण पर जोर दें

शहडोल में अब तक लगभग एक लाख मवेशियों को मुफ्त टीका लगाया जा चुका है। विभाग की टीम लगातार गांव-गांव पहुंचकर उपचार और टीकाकरण कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस वायरस से मृत्यु दर बहुत कम है, लेकिन लापरवाही भारी नुकसान करा सकती है।

लंपी वायरस क्या है और कहाँ से आया?

लंपी वायरस, जिसे Lumpy Skin Disease भी कहा जाता है, पॉक्सविरिडे परिवार के नीथलिंग वायरस के कारण होता है। यह केवल गोवंश में फैलता है और चिकन पॉक्स की तरह त्वचा पर उभार बनाता है। दुनिया में इसका पहला मामला 1929 में जांबिया में दर्ज हुआ था, जबकि भारत में यह बीमारी 2019 में ओडिशा में पहली बार देखी गई।

शहडोल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ने और समय पर इलाज शुरू होने से अब स्थिति सामान्य होने लगी है। सही उपचार और टीकाकरण से मवेशी जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं, इसलिए सतर्कता और समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है।

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