नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को फिलहाल सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल मेदांता स्थानांतरित करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनका इलाज सफदरजंग अस्पताल में ही जारी रहेगा। कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई तय की है।
डॉक्टरों का फैसला ही होगा अंतिम
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की बेंच ने कहा कि सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती करने का फैसला कानून के दायरे में लिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर जीवन अनमोल है और उनके इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। कोर्ट ने कहा कि इलाज के दौरान अंतिम निर्णय अस्पताल की मेडिकल टीम का होगा और वांगचुक को डॉक्टरों का सहयोग करना चाहिए।
मेडिकल टीम की निगरानी में चल रहा इलाज
सुनवाई के दौरान एम्स की चिकित्सा टीम से जुड़े डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि वांगचुक की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्हें ओरल फ्लूइड्स और पोटैशियम क्लोराइड दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि लंबे उपवास के कारण वे कीटोसिस की स्थिति में हैं, जिससे शरीर में पानी और कार्बोहाइड्रेट की कमी हो गई है। फिलहाल उन्हें पोटैशियम, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की आवश्यकता है। हालांकि उन्हें आईवी फ्लूइड्स देने की सलाह दी गई है, लेकिन उन्होंने अभी तक इसके लिए सहमति नहीं दी है।
सरकार ने कहा- जरूरत पड़ी तो एम्स भेजेंगे
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि शरीर में पोटैशियम की गंभीर कमी और तबीयत बिगड़ने के कारण वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा कि यदि चिकित्सकीय जरूरत हुई तो सरकार और दिल्ली पुलिस उन्हें एम्स में स्थानांतरित करने के लिए भी तैयार हैं। सरकार के अनुसार फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है।
मेदांता शिफ्ट करने की मांग पर कोर्ट का इनकार
वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है और उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल व डॉक्टर चुनने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि सफदरजंग अस्पताल में निजी डॉक्टरों और वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं मिल रही है, इसलिए उन्हें मेदांता भेजा जाए। इस पर अदालत ने सरकारी डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का कोई आधार नहीं माना और फिलहाल निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
परिवार को अस्पताल में रहने की अनुमति
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं। उनकी पत्नी, भाई और जीजा को 24 घंटे उनके साथ रहने की अनुमति दी गई है तथा परिवार के लिए अस्पताल में अलग कमरा भी उपलब्ध कराया गया है। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।