करोड़ों खर्च के बाद भी मेडल से खाली हाथ! एशियन गेम्स के नतीजों पर खेल मंत्रालय सख्त

नई दिल्ली। एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन को लेकर खेल मंत्रालय अब एक्शन मोड में है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन, चोट और तैयारियों से जुड़े तमाम पहलुओं की समीक्षा के लिए 13 अक्टूबर को अहम बैठक बुलाई गई है। बैठक में 40 से अधिक खेल महासंघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी इसमें मौजूद रहेंगे।

करोड़ों खर्च के बावजूद उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, 9 अलग-अलग खेलों के 34 प्रमुख खिलाड़ियों पर करीब 27.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इनसे अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिल सका। बैडमिंटन, शूटिंग और एथलेटिक्स समेत कई खेलों में अनुभवी खिलाड़ियों का प्रदर्शन समीक्षा के केंद्र में रहेगा।

23 अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने वाले 89 अनुभवी खिलाड़ियों में से कोई भी पदक नहीं जीत सका। वहीं कुछ खिलाड़ी चोट के कारण प्रतियोगिता में उतर ही नहीं पाए। मंत्रालय यह भी जांच करेगा कि चोट से जुड़े मामलों में फिटनेस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया सही थी या नहीं।

पिछली बार के मुकाबले घटे भारत के पदक

आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत ने 21 स्वर्ण सहित कुल 85 पदक जीते। यह प्रदर्शन हांगझोऊ एशियाई खेलों के 106 पदकों की तुलना में कम रहा। पिछली बार भारत ने 20 स्वर्ण पदक जीते थे, जबकि इस बार कई ऐसी स्पर्धाओं में स्वर्ण नहीं मिल पाया, जहां भारत को मजबूत दावेदार माना जा रहा था।

मंत्रालय के अनुसार, कुछ अनुभवी खिलाड़ी अपेक्षित स्तर का प्रदर्शन नहीं कर सके, जबकि युवा खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन कर अपनी छाप छोड़ी।

नए खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी रहेगा फोकस

बैठक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा होगी। महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में 48 साल बाद भारत को स्वर्ण दिलाने वाली नीरू ढांडा जैसे खिलाड़ियों के लिए आगे की तैयारी और समर्थन का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

एथलेटिक्स में विथ्या रामराज ने पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वाली एकमात्र एथलीट रहीं। महिला खिलाड़ियों ने कुल 47 पदक जीतकर भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।

चीन और दक्षिण कोरिया भी पिछड़े

पदकों की तुलना करें तो पिछले एशियाई खेलों की तुलना में जापान को छोड़कर प्रमुख देशों के प्रदर्शन में गिरावट आई। चीन के पदक 383 से घटकर 341, जबकि दक्षिण कोरिया के पदक 190 से घटकर 150 रह गए। भारत के पदक भी 106 से घटकर 85 हुए। हालांकि भारत पदक तालिका में पिछली बार की तरह चौथे स्थान पर रहा।

खिलाड़ियों की तैयारी और फिटनेस पर होगी चर्चा

खेल मंत्रालय यह भी समीक्षा करेगा कि चोटिल खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के लिए जापान भेजने की प्रक्रिया क्या थी। खिलाड़ियों की फिटनेस, प्रशिक्षण, विदेश यात्राओं और तैयारी पर होने वाले खर्च की भी समीक्षा की जाएगी।

मंत्रालय का मानना है कि पदक न मिलने पर भी अगर खिलाड़ी पूरी क्षमता और संघर्ष के साथ मुकाबला करता है तो उसके प्रदर्शन की आलोचना नहीं की जाती। लेकिन जहां प्रयास और प्रतिस्पर्धात्मक जज्बे में कमी दिखाई देती है, वहां जवाबदेही तय करना जरूरी है। 13 अक्टूबर की बैठक में इन्हीं मुद्दों पर विस्तार से मंथन कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

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