दुर्ग। न्याय पाने की राह में दूरी बाधा न बने और न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम एवं प्रभावी हो, इस दिशा में दुर्ग न्यायालय में तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक जमानत आवेदन पर सुनवाई कर उसका निराकरण किया गया। वहीं, एक अन्य विचारणाधीन प्रकरण में मुंबई और चेन्नई में मौजूद महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करने के साथ प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही भी पूरी कराई गई। न्यायिक कार्यों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का यह उपयोग डिजिटल न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जमानत आवेदन पर सुनवाई
न्यायालयीन कार्यवाही में तकनीक के उपयोग से अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से अपनी बात रखने की सुविधा मिली। एक प्रकरण में अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत आवेदन पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आवेदन का विधिवत निराकरण किया।
इस व्यवस्था से न्यायिक कार्यवाही में वर्चुअल सहभागिता संभव हुई। साथ ही, आवागमन में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत में मदद मिली। डिजिटल माध्यमों का उपयोग न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने और संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने में सहायक साबित हो रहा है।
मुंबई और चेन्नई के गवाहों के बयान दुर्ग में दर्ज
डिजिटल न्याय व्यवस्था का प्रभाव एक अन्य विचारणाधीन प्रकरण में भी देखने को मिला, जहां मुंबई और चेन्नई में निवासरत महत्वपूर्ण गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दुर्ग न्यायालय की कार्यवाही से जोड़ा गया। निर्धारित तकनीकी एवं विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए गवाहों के बयान दर्ज किए गए और प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही पूरी कराई गई।
इस पहल से गवाहों को लंबी दूरी तय कर न्यायालय तक पहुंचने में होने वाली कठिनाइयों को कम करने में मदद मिली। साथ ही, साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा हुई। यह व्यवस्था दर्शाती है कि तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से न्यायिक कार्यवाही में भौगोलिक दूरी की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिजिटल न्याय के साथ विधिक जागरूकता पर भी जोर
न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का लाभ अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल सुविधाओं की जानकारी आम नागरिकों और संबंधित हितधारकों तक पहुंचाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन और प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में विधिक जागरूकता संबंधी प्रयास किए जा रहे हैं।
इन प्रयासों के तहत आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को न्यायिक एवं विधिक सेवाओं से जुड़ी उपलब्ध सुविधाओं तथा तकनीकी संसाधनों के उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों, विधिक सहायता की उपलब्धता और न्याय तक पहुंचने के विभिन्न माध्यमों से परिचित कराना है।
तकनीक से न्याय तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास
डिजिटल माध्यमों के जरिए न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुलभ बनाने की पहल समय की जरूरत बनती जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जमानत आवेदन पर सुनवाई और दूसरे शहरों में मौजूद गवाहों के बयान दर्ज किए जाने जैसे उदाहरण बताते हैं कि तकनीक न्यायिक प्रक्रिया में व्यावहारिक सुविधा प्रदान कर सकती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा डिजिटल सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों का उद्देश्य न्यायिक संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करना तथा पात्र व्यक्तियों तक विधिक सहायता की जानकारी पहुंचाना है। तकनीक और विधिक जागरूकता का यह समन्वय न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, सुविधाजनक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।