नई दिल्ली। शरीर के किसी भी हिस्से में बनने वाली हर गांठ सामान्य नहीं होती। कई लोग इसे मामूली सूजन, चर्बी की गांठ या चोट का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मामलों में यह सारकोमा (Sarcoma) नामक दुर्लभ कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए किसी भी असामान्य गांठ की समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों के मुताबिक, सारकोमा शरीर के कनेक्टिव टिश्यू जैसे मांसपेशियां, फैट, नसें, रक्त वाहिकाएं, त्वचा की गहरी परतें और हड्डियों में विकसित होने वाला कैंसर है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार गांठ बिना दर्द के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है, जिससे मरीज इसे सामान्य समस्या मानकर इलाज में देरी कर देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई गांठ लगातार आकार में बढ़ रही हो, मांसपेशियों की गहराई में महसूस हो, दर्द या सुन्नपन पैदा कर रही हो, हिलने-डुलने में परेशानी हो रही हो या पहले हटाने के बाद दोबारा बन गई हो, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, बोन सारकोमा के मामलों में लगातार हड्डियों में दर्द, सूजन और प्रभावित अंग का सामान्य रूप से इस्तेमाल करने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सारकोमा की पुष्टि के लिए डॉक्टर क्लिनिकल जांच के साथ MRI, CT स्कैन और बायोप्सी जैसी जांच कराते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी संदिग्ध गांठ को बिना उचित जांच और योजना के हटाना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे आगे का इलाज प्रभावित हो सकता है।
इलाज मरीज की स्थिति, कैंसर के प्रकार, आकार और स्टेज पर निर्भर करता है। इसमें सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी या इनका संयोजन अपनाया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सारकोमा का समय पर पता चल जाए तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए शरीर में बनने वाली किसी भी असामान्य या लगातार बढ़ रही गांठ को हल्के में लेने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।