श्रीरुद्राम्बिका महायज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ अग्नि प्राकट्य, श्रीराम कथा में उमड़े श्रद्धालु

गाजीपुर। जनपद के नौली ग्राम के श्रीरुद्राम्बिका धाम परिसर में बुधवार को आयोजित श्रीरुद्राम्बिका महायज्ञ सह श्रीराम कथा के तीसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच काष्ठ पात्र से अग्नि का प्राकट्य कराया गया। वैदिक विधि-विधान के साथ अग्निदेव के आवाहन के पश्चात यज्ञाहुति प्रारंभ हुई। इस दौरान यज्ञशाला में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यज्ञाचार्य पंडित डॉ. धनंजय पांडेय के मार्गदर्शन में आचार्यों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ अग्नि प्राकट्य की प्रक्रिया संपन्न कराई।

काष्ठ पात्र के माध्यम से अग्नि प्रकट करने की प्राचीन वैदिक पद्धति आज के दौर में अपेक्षाकृत विरल है। ऐसे में इस पारंपरिक विधि से अग्नि प्राकट्य आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। अग्नि प्रकट होते ही श्रद्धालुओं ने ‘अग्निदेव की जय’, ‘यज्ञ भगवान की जय’ और ‘नारायण भगवान की जय’ के जयकारे लगाए। इसके बाद यज्ञकुंड में आहुतियां अर्पित करने का क्रम शुरू हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञकुंड की परिक्रमा कर अनुष्ठान में सहभागिता की।

यज्ञाचार्य पंडित डॉ. धनंजय पांडेय ने कहा कि वैदिक मंत्रों में विशेष शक्ति होती है। शुद्ध और सात्विक मन से देवताओं का आवाहन तथा प्रार्थना करने से साधक को आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि काष्ठ पात्र से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि का प्राकट्य प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। श्रीरुद्राम्बिका धाम की यज्ञशाला में इस विधि से अग्नि प्राकट्य और यज्ञाहुति का शुभारंभ श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अनुभव रहा।

महायज्ञ के क्रम में अपराह्न दो बजे से श्रीराम कथा का आयोजन हुआ। परम पूज्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के कृपापात्र कथावाचक श्री विजय कौशिक जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े मार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। श्रद्धालुओं ने एकाग्रता और श्रद्धाभाव से कथा का श्रवण किया। कथा समापन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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