रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी विद्यालयों का संचालन बेहतर ढंग से किया जाए और विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को कम से कम 20 तक का पहाड़ा याद होना चाहिए।
नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) की समीक्षा बैठक में मंत्री ने शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को 20 तक और आठवीं कक्षा के छात्रों को 25 तक का पहाड़ा जुबानी याद होना चाहिए। इसके साथ ही विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
हिंदी और अंग्रेजी दोनों में मजबूत हो पकड़
शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आत्मविश्वास के साथ संवाद करने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता मजबूत हो सके।
मंत्री ने जिला और विकासखंड स्तर के शिक्षा अधिकारियों को नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने तथा शिक्षण व्यवस्था की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जर्जर स्कूल भवनों पर सख्ती
बैठक में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी अहम निर्णय लिए गए। गजेंद्र यादव ने निर्देश दिए कि पूरी तरह जर्जर और खतरनाक हो चुके स्कूल भवनों को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित ढंग से ध्वस्त किया जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
इसके अलावा जिन विद्यालयों के पास पर्याप्त भवन सुविधा नहीं है, उनकी स्थिति की समीक्षा जिला कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) के माध्यम से कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता और सुरक्षा पर जोर
बैठक में मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके लिए विद्यार्थियों की बुनियादी सीखने की क्षमता, गणितीय ज्ञान, भाषाई कौशल और स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें और प्रदेश के सरकारी स्कूलों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीरता से कार्य करें।