इस्लामाबाद: मिडिल ईस्ट में ईरान और क्षेत्रीय तनाव को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने एक आपसी रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में अपनी सैन्य मौजूदगी को काफी बढ़ा दिया है।
सूत्रों और रॉयटर्स की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब में लगभग 8000 सैनिक, लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन और एक आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली तैनात की है। इसे एक “युद्ध-सक्षम रणनीतिक बल” के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में सऊदी अरब को सैन्य सहयोग देना बताया जा रहा है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर पाकिस्तान और सऊदी अरब की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
चीन निर्मित फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती
रिपोर्ट के अनुसार, तैनात किए गए फाइटर जेट्स में मुख्य रूप से चीन के सहयोग से विकसित जेएफ-17 थंडर विमान शामिल हैं। इसके अलावा ड्रोन स्क्वाड्रन और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए गए हैं।
सूत्रों का दावा है कि इन सैन्य संसाधनों के संचालन की जिम्मेदारी पाकिस्तानी जवानों के पास है, जबकि पूरा खर्च सऊदी अरब द्वारा वहन किया जा रहा है।
80 हजार सैनिकों की संभावित तैनाती का दावा
कुछ सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, एक गुप्त रक्षा समझौते में भविष्य में सऊदी अरब में 80 हजार तक पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती का प्रावधान भी शामिल हो सकता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
“न्यूक्लियर छत्रछाया” पर भी चर्चा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस समझौते को लेकर पाकिस्तान की “परमाणु सुरक्षा छत्रछाया” को लेकर भी चर्चा हुई है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय तनाव और भू-राजनीतिक हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं।
फिलहाल दोनों देशों की चुप्पी के बीच इस पूरे घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।