मुंबई : मुंबई से मिली जानकारी के अनुसार, वैश्विक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी और प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले की अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठे विवाद ने बाजार की दिशा ही बदल दी।
शुरुआत में बाजार से सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। वैश्विक बाजारों में मजबूती और गिफ्ट निफ्टी के ऊंचे स्तर पर खुलने की उम्मीद ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया था। लेकिन सप्ताहांत में आई नई खबरों—जिनमें होर्मुज क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ने की बात कही गई—ने पूरे माहौल को पलट दिया। इसके चलते बाजार खुलते ही अस्थिरता का दौर शुरू हो गया।
कारोबार के दौरान आईटी और रियल एस्टेट सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जबकि ऑटो और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने की कोशिश की। इसके बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज बिकवाली हावी रही, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 71 हजार करोड़ रुपये तक घट गया।
हालांकि दिनभर की भारी उठापटक के बाद बाजार ने थोड़ी रिकवरी दिखाई। अंत में सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी हल्की तेजी के साथ टिक पाया। कुल मिलाकर, दिन निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा, जहां वैश्विक घटनाक्रमों ने घरेलू बाजार की चाल को प्रभावित किया।