नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर गहराती चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही पांच देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर जाएंगे। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इस बहुप्रतीक्षित दौरे की विस्तृत जानकारी साझा की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात (UAE) होगा। भारत और यूएई के बीच पहले से ही मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, जिनमें ऊर्जा सहयोग प्रमुख भूमिका निभाता है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तेल की निर्बाध आपूर्ति, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही यूएई में रह रहे प्रवासी भारतीयों के हितों और उनके योगदान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यूएई यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे, स्वीडन, इटली और नीदरलैंड का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, आगामी नॉर्डियक सम्मेलन के मद्देनजर यह यात्रा भारत के ‘विकसित भारत’ विजन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ये चारों देश वैश्विक स्तर पर नवाचार और आधुनिक तकनीक के बड़े केंद्र माने जाते हैं। भारत सरकार इन देशों के साथ तकनीकी सहयोग, इनोवेशन और निवेश के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ऊर्जा संकट को लेकर सरकार की रणनीति पर भी स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी बाधा के पूरा करना है। इसके लिए वैश्विक बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय हालातों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील भी की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह विदेश दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक साझेदारियों को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।