बीजिंग/नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच एक बार फिर कूटनीतिक तनातनी बढ़ती नजर आ रही है। भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के आधिकारिक नामों को अपने मानचित्र में शामिल किया है। इनमें झील, बस्तियां और ऐतिहासिक स्मारक शामिल बताए गए हैं। भारत के इस कदम पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है।
चीन ने बताया ‘अस्वीकार्य और गैर-कानूनी’
भारत के कदम पर चीन ने सोमवार को प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘अस्वीकार्य और गैर-कानूनी’ बताया। चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को अपने ‘जंगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा दोहराया है।
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है। भारत ने चीन के इस दावे को हमेशा खारिज किया है और अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है।
2017 से चीन भी बदलता रहा है नाम
भारत के इस कदम के बीच चीन की पुरानी नीति भी चर्चा में है। चीन ने 2017 से अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदलकर अपने आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल करने की कोशिश की है।
भारत ने चीन की ओर से किए गए नामकरण को पहले भी खारिज करते हुए कहा है कि किसी स्थान का नाम बदल देने से उसकी वास्तविक स्थिति या संप्रभुता नहीं बदल जाती।
अरुणाचल प्रदेश पर भारत का स्पष्ट रुख
भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। नई दिल्ली का कहना है कि राज्य के स्थानों के नाम तय करने और उन्हें आधिकारिक मानचित्र में दर्ज करने का अधिकार भारत के पास है।
भारत-चीन सीमा विवाद के बीच दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कई बार तनाव की स्थिति भी बन चुकी है। ऐसे में स्थानों के नाम को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी को कूटनीतिक तनाव के एक और संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
चीनी मीडिया ने भी जताई चिंता
भारत के कदम के बाद चीन के सरकारी मीडिया में भी प्रतिक्रिया सामने आई है। ग्लोबल टाइम्स ने इसे भारत का एकतरफा कदम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी तनाव दोबारा बढ़ सकता है।
वहीं, भारत का रुख है कि अरुणाचल प्रदेश की स्थिति को लेकर उसका पक्ष स्पष्ट है और राज्य भारत का हिस्सा है। दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे के समाधान को लेकर बातचीत और कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी रहे हैं।