नई दिल्ली। भारत ने अपनी सामरिक शक्ति को नई मजबूती देते हुए अत्याधुनिक ‘अग्नि’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ (MIRV) तकनीक से लैस इस मिसाइल के परीक्षण ने दुनिया के सामने भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने में सक्षम हो जाती है।
यह परीक्षण ओडिशा तट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रणनीतिक बल कमान (SFC) की संयुक्त निगरानी में किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल के विभिन्न पेलोड्स ने हिंद महासागर क्षेत्र में निर्धारित अलग-अलग लक्ष्यों पर सटीक प्रहार किया। मिशन की निगरानी के लिए रडार, टेलीमेट्री और समुद्री ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया, जिन्होंने सभी उद्देश्यों के सफल रहने की पुष्टि की।
रक्षा सूत्रों का मानना है कि यह परीक्षण अग्नि-5 मिसाइल के उन्नत संस्करण का हो सकता है, जिसमें MIRV के साथ अत्याधुनिक हाइपरसोनिक तकनीक भी शामिल किए जाने की संभावना है। इस सफलता के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में और मजबूत स्थिति में पहुंच गया है, जिनके पास बहु-लक्ष्य भेदी मिसाइल क्षमता मौजूद है।
MIRV तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही मिसाइल से कई वारहेड अलग-अलग दिशाओं में भेजे जा सकते हैं। प्रत्येक वारहेड स्वतंत्र रूप से तय लक्ष्य तक पहुंचकर हमला करने में सक्षम होता है। इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदना आसान हो जाता है और रणनीतिक बढ़त मिलती है।
गौरतलब है कि भारत इससे पहले मार्च 2024 में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत भी अग्नि-5 का MIRV परीक्षण कर चुका है। ताजा परीक्षण को उस क्षमता का और अधिक उन्नत चरण माना जा रहा है।
इस परियोजना के विकास में DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और देश के स्वदेशी रक्षा उद्योगों की अहम भूमिका रही है। परीक्षण के दौरान रक्षा वैज्ञानिकों और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौजूद रहकर मिशन की सफलता पर संतोष व्यक्त किया।