सेमीकॉन 2.0 में निवेश की सीमाएं तय, फैब को 40% सब्सिडी; स्टार्टअप्स को ₹15 करोड़ तक फंडिंग

नई दिल्ली देश में सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ (सेमीकॉन 2.0) के तहत कंपनियों के लिए पात्रता और निवेश से जुड़ी शर्तें तय कर दी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी योजना के अनुसार, सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को टेक्नोलॉजी, निवेश, राजस्व और उत्पादन क्षमता जैसे मानकों को पूरा करना होगा।

केंद्र सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य देश में चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, उपकरण, कच्चे माल और रिसर्च एंड डेवलपमेंट समेत पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

रणनीतिक सेमीकंडक्टर डिजाइन में भारतीय स्वामित्व जरूरी

रणनीतिक सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में आवेदन करने वाली कंपनियों का भारत में रजिस्टर्ड होना और उनका मुख्यालय भी भारत में होना जरूरी होगा। कंपनी की देश में पर्याप्त ऑपरेशनल और मैनपावर मौजूदगी के साथ उसका मालिकाना हक और नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास होना चाहिए।

ऐसी कंपनियां अकेले या वैश्विक कंपनियों, रिसर्च संस्थानों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी में आवेदन कर सकेंगी।

स्टार्टअप और MSME को ₹15 करोड़ तक सीड फंडिंग

कमर्शियल सेमीकंडक्टर डिजाइन के लिए भी कंपनी का भारत में रजिस्टर्ड और मुख्यालय वाला होना जरूरी होगा। इसमें भारतीय नागरिकों या ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनियां पात्र होंगी।

योग्य स्टार्टअप और MSME को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 15 करोड़ रुपये, जो भी कम हो, माइलस्टोन से जुड़ी सीड फंडिंग मिल सकती है। वेंचर कैपिटल या प्राइवेट इक्विटी से समर्थित कंपनियों को इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट का लाभ भी मिल सकता है।

बड़ी कंपनियों के लिए रॉयल्टी फाइनेंसिंग

योजना के तहत बड़ी पात्र कंपनियों को रॉयल्टी फाइनेंसिंग की सुविधा भी दी गई है। इसके तहत लाभार्थी अपने प्रोडक्ट या टेक्नोलॉजी से होने वाली नेट कमाई का 5 प्रतिशत सरकार को तब तक देंगे, जब तक सरकारी सहायता की 1.5 गुना राशि की वसूली नहीं हो जाती।

चिप और SoC डिजाइन पर 9% तक रीइंबर्समेंट

हाल ही में लॉन्च किए गए सेमीकंडक्टर IP, चिप्स और सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) के लिए योग्य आवेदकों को नेट बिक्री पर पांच साल तक 9 प्रतिशत रीइंबर्समेंट मिल सकता है।

हालांकि, यह सहायता प्रति आवेदन अधिकतम 30 करोड़ रुपये और एक कंपनी या उसके समूह के लिए अधिकतम 120 करोड़ रुपये तक सीमित होगी।

उपकरण और कच्चे माल के लिए अलग निवेश सीमा

सेमीकंडक्टर उपकरणों से जुड़ी R&D सुविधाओं के लिए कम से कम 300 करोड़ रुपये का निवेश और 120 करोड़ रुपये का राजस्व जरूरी होगा।

रॉ-मटीरियल सुविधाओं के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये का निवेश और 20 करोड़ रुपये का राजस्व, जबकि टेस्ट एवं कैरेक्टराइजेशन सुविधाओं के लिए 100 करोड़ रुपये का निवेश और 40 करोड़ रुपये का राजस्व जरूरी होगा।

इक्विपमेंट और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं के लिए भी कम से कम 300 करोड़ रुपये का निवेश और 120 करोड़ रुपये का राजस्व निर्धारित किया गया है। इन क्षेत्रों में पात्र पूंजीगत खर्च का 30 प्रतिशत तक सरकारी सहयोग दिया जाएगा।

घरेलू खरीद पर PLI का भी लाभ

इक्विपमेंट और कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को वित्त वर्ष 2028-29 से पांच साल तक घरेलू निर्माताओं से खरीदे गए कंपोनेंट्स की वैल्यू पर 10 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक PLI का लाभ मिल सकता है।

हालांकि, कुल सरकारी सहायता पात्र पूंजीगत व्यय के 50 प्रतिशत तक सीमित रहेगी।

सिलिकॉन वेफर फैब के लिए सबसे कड़े मानक

योजना में सिलिकॉन वेफर फैब्रिकेशन प्लांट के लिए सबसे कड़े पात्रता मानक रखे गए हैं। परियोजना में 300-mm वेफर्स का इस्तेमाल होना चाहिए और क्षमता कम से कम 40,000 वेफर स्टार्ट प्रति माह होनी चाहिए।

इसके अलावा, प्रोडक्शन-ग्रेड लाइसेंस प्राप्त तकनीक का इस्तेमाल जरूरी होगा। परियोजना में कम से कम 20,000 करोड़ रुपये का निवेश और पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से कम से कम एक वर्ष में 7,500 करोड़ रुपये का राजस्व होना आवश्यक है।

ऐसी परियोजनाओं को पात्र पूंजीगत खर्च का 40 प्रतिशत सरकारी सहयोग पारी-पासु आधार पर दिया जाएगा।

कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब को 35% सहायता

कंपाउंड सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स, सेंसर/MEMS और डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर फैब के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का निवेश और 200 करोड़ रुपये का राजस्व जरूरी होगा। इनकी क्षमता कम से कम 500 वेफर स्टार्ट प्रति माह होनी चाहिए।

इन परियोजनाओं को पात्र पूंजीगत खर्च पर 35 प्रतिशत तक सरकारी सहायता मिलेगी।

ATMP और OSAT सुविधाओं को भी बढ़ावा

एडवांस्ड पैकेजिंग से जुड़ी ATMP/OSAT सुविधाओं के लिए कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का निवेश और 200 करोड़ रुपये का राजस्व आवश्यक होगा। ऐसे प्रोजेक्ट्स को पात्र कैपेक्स पर 35 प्रतिशत सहायता मिलेगी।

वहीं, पुराने पैकेजिंग प्रोजेक्ट्स के लिए समान निवेश और राजस्व मानकों के साथ 25 प्रतिशत कैपेक्स सपोर्ट का प्रावधान किया गया है।

सेमीकंडक्टर R&D के लिए 75% तक मदद

सरकार एडवांस्ड सेमीकंडक्टर रिसर्च एंड डेवलपमेंट को भी बढ़ावा देगी। इसके तहत योग्य परियोजनाओं की लागत के 75 प्रतिशत तक सरकारी सहयोग का प्रावधान है। इसमें पात्र पूंजीगत और परिचालन खर्च शामिल होंगे।

तीन साल तक आवेदन का मौका

यह योजना सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के छह स्तंभों और 10 श्रेणियों को कवर करती है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) इस योजना की नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा।

ISM आवेदन करने वाली कंपनियों का मूल्यांकन प्रोसेस टेक्नोलॉजी, परियोजना लागू करने की क्षमता, ऑपरेशनल क्षमता, ऑफ-टेक और अन्य तकनीकी एवं वित्तीय मानकों के आधार पर करेगा।

सरकार ने इस योजना को शुरुआती तौर पर तीन साल तक आवेदन के लिए खुला रखने का फैसला किया है। सरकार को उम्मीद है कि सेमीकॉन 2.0 से देश में चिप निर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग और सेमीकंडक्टर रिसर्च के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकेगा।

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