कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हलचल तेज हो गई है। चुनावी नतीजों को लेकर ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए हार को मानने से इनकार किया और पूरे घटनाक्रम को अन्यायपूर्ण बताया। नवनिर्वाचित विधायकों के साथ हुई बैठक में उन्होंने साफ संकेत दिया कि यह मामला यहीं नहीं रुकेगा और जरूरत पड़ी तो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जा सकता है।
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि उनके कई उम्मीदवारों को सुनियोजित तरीके से हराया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग, केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के सैकड़ों दफ्तरों पर कब्जा किया गया और उनके साथ भी अभद्र व्यवहार हुआ, जिससे उन्हें शारीरिक तकलीफ हुई। इन सबके बावजूद उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह इस्तीफा देने वाली नहीं हैं और अगर किसी को उन्हें हटाना है, तो वह औपचारिक प्रक्रिया अपनाए।
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा और सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए अपने विधायकों से विधानसभा सत्र के पहले दिन काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराने की अपील की। साथ ही, पार्टी के भीतर असंतोष या विश्वासघात करने वालों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
दरअसल, यह बैठक विधानसभा में विपक्ष की भूमिका तय करने और नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर बुलाई गई थी। लेकिन इस अहम बैठक में सभी विधायक शामिल नहीं हुए। करीब 10 विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के अंदर संभावित मतभेदों और भविष्य में किसी बड़े बदलाव की अटकलों को और हवा दे दी है। चुनावी हार के बाद TMC के भीतर बनते हालात अब राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहे हैं।