नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुजरात के गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के पुस्तकालयों को आपस में जोड़ने वाले ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य गांवों के बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करना और उन्हें गांव में ही व्यापक ज्ञान संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
इस डिजिटल नेटवर्क से अब तक 752 पुस्तकालय जुड़ चुके हैं। इसके अलावा करीब 2.80 लाख पुस्तकों वाले चार बड़े पुस्तकालयों को ग्रामीण पुस्तकालयों के साथ जोड़ा गया है।
हर गांव में पुस्तकालय खोलने की योजना
अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस एस. आर. रंगनाथन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इसी दिन गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ की शुरुआत की गई है।
उन्होंने बताया कि गांधीनगर, कलोल और साणंद विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में 63 पुस्तकालय शुरू किए जा रहे हैं। प्रत्येक पुस्तकालय में करीब 5 से 6 हजार पुस्तकें उपलब्ध कराने की योजना है। इन पुस्तकालयों को स्कूलों के पास या गांव के बीच में स्थापित किया जा रहा है, ताकि बच्चों और ग्रामीणों के लिए यहां पहुंचना आसान हो।
बच्चों और युवाओं के लिए अलग-अलग विषयों की किताबें
गृह मंत्री ने बताया कि इन पुस्तकालयों के लिए ऐसी पुस्तकों की सूची तैयार की गई है, जो बच्चों में पढ़ने की रुचि पैदा कर सकें। यहां बच्चों के लिए उपयोगी पुस्तकों के साथ किशोरों और युवाओं के करियर से संबंधित किताबें भी उपलब्ध होंगी।
इसके अलावा राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री, गुजरात का इतिहास, भारत का इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और 1857 की क्रांति से संबंधित पुस्तकें भी ग्रामीण पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई जाएंगी।
2.80 लाख किताबों तक ग्रामीण पाठकों की पहुंच
अमित शाह ने कहा कि ग्रामीण पुस्तकालयों को चार बड़े पुस्तकालयों से जोड़ा गया है, जिनमें करीब 2 लाख 80 हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं। इससे गांव के पाठकों को स्थानीय पुस्तकालय में मौजूद 5-6 हजार किताबों के अलावा बहुत बड़े पुस्तक संग्रह तक पहुंच मिल सकेगी।
हर 15 दिन में गांव पहुंचेंगी नई किताबें
ग्रामीण पाठकों तक नियमित रूप से नई किताबें पहुंचाने के लिए सांसद निधि से पुस्तकालय वैन की व्यवस्था की गई है। ये वैन हर 15 दिन में गांवों का दौरा करेंगी। पहले उपलब्ध कराई गई पुस्तकों को वापस लिया जाएगा और ऐप पर पंजीकृत नई पुस्तकों को संबंधित ग्रामीण पुस्तकालयों तक पहुंचाया जाएगा।
इस व्यवस्था से बच्चों और अन्य पाठकों को लगातार नए विषयों और पुस्तकों को पढ़ने का अवसर मिलेगा।
752 पुस्तकालय ऐप से जुड़े
अमित शाह ने कहा कि ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ की परिकल्पना को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य सरकार ने आगे बढ़ाया है। वर्तमान में 752 पुस्तकालय ऐप से जुड़ चुके हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी विषय में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए ही नहीं, बल्कि प्राथमिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए भी पढ़ना जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर योग्य ग्रंथपाल बच्चों और युवाओं को पढ़ने के विषयों तथा पुस्तकों के अलग-अलग पहलुओं पर मार्गदर्शन दें तो पुस्तकालय देश के लिए उपयोगी नागरिक तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
माणसा के पुस्तकालय से जुड़ी यादें साझा कीं
अमित शाह ने माणसा के महात्मा गांधी पुस्तकालय का उल्लेख करते हुए अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि वह करीब 16 वर्षों तक इस पुस्तकालय से जुड़े रहे और वहां विभिन्न विषयों का प्राथमिक ज्ञान हासिल किया।
उन्होंने कहा कि माणसा से अहमदाबाद आने के बाद गुजरात विद्यापीठ के पुस्तकालय से जुड़ने का अवसर मिला। उनके अनुसार, अलग-अलग विषयों को जानने की प्रवृत्ति धीरे-धीरे आदत और फिर अभ्यास में बदल गई और पुस्तकालयों ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘हब एंड स्पोक’ मॉडल से जुड़ेंगे पुस्तकालय
गृह मंत्री ने बताया कि ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ के तहत ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के जरिए पुस्तकालयों और पुस्तकों को ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से सस्तु साहित्य मंडल, गीता प्रेस, भूपेन हजारिका संस्थान और तिरुवल्लुवर संस्थान जैसे संस्थानों को गांधीनगर और गुजरात के पुस्तकालय नेटवर्क से ऑनलाइन जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों और पाठकों को व्यापक ज्ञान सामग्री तक डिजिटल पहुंच मिल सकेगी।
बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें माता-पिता
अमित शाह ने देश और राज्य की गृहिणियों से भी अपील की कि वे अपने खाली समय का उपयोग विभिन्न विषयों की जानकारी हासिल करने में करें और बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने में परिवार का माहौल महत्वपूर्ण होता है। माता-पिता की प्रेरणा बच्चों को पुस्तकालयों और पुस्तकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकती है।