ईंधन संकट के बीच पाकिस्तान मंत्री का बयान, भारत की ऊर्जा नीति की सराहना

इस्लामाबाद: वैश्विक स्तर पर ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल के दामों में तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़कर करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

इस बीच पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने ईंधन संकट को लेकर बयान देते हुए भारत और पाकिस्तान की स्थिति में बड़ा अंतर बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट का असर दोनों देशों पर अलग-अलग तरह से पड़ा है, जिसका मुख्य कारण उनकी आर्थिक और ऊर्जा संबंधी तैयारियां हैं।

मलिक के अनुसार, भारत के पास मजबूत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और विविध स्रोतों से तेल आयात की क्षमता मौजूद है। इसी वजह से वह अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद ईंधन आपूर्ति को काफी हद तक संतुलित रखने में सक्षम है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने भंडारों और वित्तीय ताकत के सहारे आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित होने से बचाया है।

इसके विपरीत, पाकिस्तान की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बताई गई है। मंत्री ने स्वीकार किया कि देश के पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं है और केवल सीमित वाणिज्यिक स्टॉक ही उपलब्ध है, जो कुछ दिनों की मांग पूरी कर सकता है। रिफाइंड फ्यूल का स्टॉक भी सीमित अवधि तक ही चल पाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरियां और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के साथ समझौते उसकी नीति विकल्पों को सीमित करते हैं। हाल ही में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार को टैक्स संरचना में बदलाव और राहत उपायों पर विचार करना पड़ा।

मलिक ने बताया कि सरकार ने डीजल पर कर भार कम करने और कुछ हिस्से में सब्सिडी देने की योजना पर काम किया है, ताकि आम जनता पर बढ़ते दामों का असर कम किया जा सके। साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर राजस्व घाटे को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

कुल मिलाकर, मौजूदा वैश्विक तेल संकट ने भारत और पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नीतिगत क्षमता के बीच स्पष्ट अंतर को उजागर कर दिया है।

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