नई दिल्ली: बुद्ध पूर्णिमाका दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। यह पर्व बौद्ध धर्म में गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ा है, वहीं हिंदू मान्यताओं में इसे विष्णु और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, व्रत और दान का विशेष फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। खासतौर पर पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा को अत्यंत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा की रोशनी मन को शांति देने के साथ-साथ मानसिक तनाव और शारीरिक समस्याओं को कम करने में सहायक होती है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, रात के समय चंद्रमा को जल, कच्चा दूध और मिश्री मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए। साथ ही “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस अवसर पर पीपल या तुलसी के पास घी का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
जो लोग मानसिक अस्थिरता या भावनात्मक कमजोरी महसूस करते हैं, उनके लिए पूर्णिमा की चांदनी में कुछ समय बिताना लाभकारी बताया गया है। इससे मन को संतुलन और शांति मिलती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उन्हें इस दिन विशेष पूजा करनी चाहिए, जिससे चंद्र दोष कम होता है।
इसके अलावा, इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। सफेद वस्त्र, दूध, चावल, मिठाई या अन्य सफेद खाद्य पदार्थों का दान शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अन्न-धन की कमी नहीं होती।