इस्लामाबाद। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए मक्का समझौते के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच अब हूतियों ने पाकिस्तान और तुर्किए को भी चेतावनी दी है। हूती नेता अल-बुखैती ने कहा है कि यदि दोनों देश यमन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होते हैं, तो उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है।
हूती नेतृत्व ने कहा कि यमन फिलहाल रक्षात्मक रणनीति पर काम कर रहा है, लेकिन किसी तीसरे देश के सैन्य हस्तक्षेप की स्थिति में जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यमन की संप्रभुता में विदेशी सैन्य दखल का विरोध किया है।
इस बीच सऊदी अरब में भी तनाव बढ़ा है। हूतियों की ओर से रियाद की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने की खबर सामने आई। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि मिसाइल को हवा में ही रोक दिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। यनबू में तेल पाइपलाइन और अरामको से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश को भी विफल करने का दावा किया गया है।
मक्का समझौते में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच सामूहिक सुरक्षा का प्रावधान बताया गया है। इसके तहत किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में इसे सभी के खिलाफ हमला माना जाना है। ऐसे में हूतियों की चेतावनी के बाद पाकिस्तान के सामने कूटनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ गई हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने भी इस समझौते के पीछे पाकिस्तान की भूमिका और मंशा पर सवाल उठाए हैं।