नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में एक निजी टीवी समाचार चैनल के कार्यक्रम में वैश्विक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि जहां दुनिया नई व्यवस्था की तलाश कर रही है, वहीं देश में कुछ लोग अव्यवस्था का सपना देख रहे हैं।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए सवाल किया कि पार्टी कब तक एक फेल प्रोडक्ट को लॉन्च करने की कोशिश करती रहेगी। उन्होंने कांग्रेस को परजीवी बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ता गंवाने के बाद पार्टी पूरी व्यवस्था को नष्ट करने पर उतारू हो गई है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था पर जताई चिंता
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं नई चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढालने में संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने और समुद्री मार्गों पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का भी उल्लेख किया।
चाणक्य के ‘मत्स्य न्याय’ का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने प्राचीन भारतीय विचारक चाणक्य के ‘मत्स्य न्याय’ सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कानून और दंड व्यवस्था प्रभावी नहीं रहती, तब शक्तिशाली कमजोरों का शोषण करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जो इस स्थिति को रोक सके।
ग्लोबल साउथ और विकसित भारत 2047 पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में ग्लोबल साउथ की आवाज को उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को केवल देश की प्रगति तक सीमित नहीं बताते हुए इसे बेहतर दुनिया के निर्माण से भी जोड़ा।
कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने 100 से अधिक देशों को दवाइयां उपलब्ध कराईं और जरूरतमंद देशों तक मुफ्त टीके पहुंचाए। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल अच्छे समय में नहीं, बल्कि संकट के दौरान भी प्रभावी होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर उठाए सवाल
प्रधानमंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र की स्थापना सम्मान, सहयोग और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की भावना के साथ हुई थी। हालांकि, आज की चुनौतियां बदल चुकी हैं और वैश्विक संस्थाओं को भी नई वास्तविकताओं के अनुरूप बदलाव करना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत करते हुए वैश्विक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और दुनिया के सामने नई चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने की दिशा में काम कर रहा है।