नई दिल्ली। बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुष्परिणामों से बचाने और डिजिटल स्पेस में उनकी सुरक्षा मजबूत करने के लिए संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल लाने की तैयारी की गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद बैजयंत ‘जय’ पांडा की ओर से तैयार ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स’ (SHIELD) बिल, 2025 में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल, डेटा प्राइवेसी, ऑनलाइन गेमिंग और पर्सनलाइज्ड विज्ञापनों को लेकर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।
हालांकि, शुक्रवार को संसद में लगातार हंगामे और सदन की कार्यवाही स्थगित होने के कारण यह बिल औपचारिक रूप से पेश नहीं हो सका।
13 साल से कम उम्र में अकाउंट के लिए अभिभावक की मंजूरी जरूरी
प्रस्तावित SHIELD बिल में 18 साल से कम उम्र के लोगों को नाबालिग माना गया है। इसके तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चे माता-पिता या अभिभावक की सत्यापित सहमति के बिना सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे।
बिल में बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार की ट्रैकिंग और प्रोफाइलिंग पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। साथ ही, बच्चों के डेटा के आधार पर पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने की भी अनुमति नहीं होगी।
90 दिन के भीतर डिलीट करना होगा बच्चों का डेटा
प्रस्ताव में बच्चों से जुड़ा डेटा केवल जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने तक सीमित रखने की बात कही गई है। अकाउंट निष्क्रिय होने के 90 दिनों के भीतर डेटा डिलीट करना होगा। वहीं, अभिभावक की मांग पर बच्चों का डेटा स्थायी रूप से हटाना अनिवार्य होगा।
पैरेंटल डैशबोर्ड और एज वेरिफिकेशन सिस्टम
बच्चों तक पहुंच रखने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए मजबूत एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा अभिभावकों को एक विशेष ‘पैरेंटल डैशबोर्ड’ उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसके जरिए वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी, प्राइवेसी सेटिंग्स और स्क्रीन टाइम को मैनेज कर सकेंगे।
प्लेटफॉर्म्स को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिगों को पोर्नोग्राफी, ऑनलाइन सट्टेबाजी, हिंसक या उग्रवादी सामग्री और ड्रग्स से जुड़े कंटेंट से बचाया जाए।
शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई, ₹10 करोड़ तक जुर्माना
बिल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने वाले प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव है। सभी प्लेटफॉर्म्स पर ‘Report Child Harm’ बटन उपलब्ध कराने की बात कही गई है। शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया और 48 घंटे के भीतर शिकायत के निपटारे का प्रावधान प्रस्तावित है।
बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़ी शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना जरूरी होगा। नियमों के उल्लंघन पर प्लेटफॉर्म पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार या जानबूझकर नियम तोड़ने पर भारत में प्लेटफॉर्म को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का भी प्रस्ताव है।
AI डीपफेक पर भी अलग बिल का प्रस्ताव
बैजयंत पांडा की ओर से एक अन्य प्रस्तावित बिल ‘प्रोटेक्शन ऑफ पर्सनालिटी लाइकनेस फ्रॉम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिसयूज बिल, 2026’ है। इसमें किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी आवाज, चेहरे या शारीरिक बनावट का इस्तेमाल कर AI डीपफेक तैयार करने और फैलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे AI कंटेंट को नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर और यौन रूप से अश्लील सामग्री के मामले में 12 घंटे के भीतर हटाना होगा। धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग या अश्लीलता फैलाने के लिए डीपफेक तैयार करने पर 3 साल तक की जेल और ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।