कोलकाता। पश्चिम बंगाल के आधिकारिक नाम को बदलने को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को कहा कि राज्य का नाम अब ‘पश्चिम बंग’ करने की तैयारी है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश किया जाएगा।
‘पश्चिम बंग’ ही होगी ऐतिहासिक पहचान
समिक भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य के नाम को लेकर ‘बांग्ला’, ‘वेस्ट बंगाल’, ‘पश्चिम बांग्ला’ या ‘बंग’ जैसे अलग-अलग नामों को लेकर चल रहा भ्रम खत्म किया जाएगा। उनके मुताबिक, राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए ‘पश्चिम बंग’ नाम उपयुक्त है।
उन्होंने 1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल का एक हिस्सा अलग होकर बाद में बांग्लादेश बना, जबकि भारत में रहने वाले हिस्से की पहचान पश्चिम बंग के रूप में रही है। इसी वजह से नाम में ‘पश्चिम’ शब्द का होना जरूरी है।
पहले भी हो चुकी है नाम बदलने की कोशिश
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश पहले भी कई बार हो चुकी है। वर्ष 1999 में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में विधानसभा ने ‘पश्चिम बंग’ नाम का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन इसे केंद्र से मंजूरी नहीं मिली।
इसके बाद 2011 और 2018 में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। हालांकि, यह प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ सका। अब भाजपा की ओर से ‘पश्चिम बंग’ नाम को लेकर विधेयक लाने के ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है।
PM मोदी और राहुल गांधी पर भी बोले समिक भट्टाचार्य
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में 25 वर्ष पूरे होने पर दिए गए संबोधन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद और ऋषि अरविंद के विचारों से प्रेरित प्रधानमंत्री का भाषण युवाओं और देशवासियों को प्रेरित करने वाला है।
विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के जनसमर्थन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर समिक भट्टाचार्य ने राहुल गांधी का नाम लेते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास इस समय कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है और गैर-मुद्दों को मुद्दा बनाकर राजनीति नहीं की जा सकती।
असम के मदरसा बोर्ड के विलय का समर्थन
समिक भट्टाचार्य ने असम सरकार द्वारा राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का स्कूल सर्विस कमीशन में विलय करने के फैसले का भी समर्थन किया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप कदम बताते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को भी विज्ञान और गणित सहित समान मानकों वाली शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि, ‘पश्चिम बंग’ नाम को आधिकारिक रूप देने के लिए विधानसभा की प्रक्रिया के साथ आगे की संवैधानिक और केंद्र स्तर की मंजूरियां भी महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल भाजपा की ओर से आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक पेश करने की बात कही गई है।