डॉलर की बढ़ती मांग पर RBI सख्त, तेल कंपनियों को राहत और रुपये में सट्टेबाजी पर शिकंजा

नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार कमजोरी को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने के साथ विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए भी नियम सख्त किए हैं। नई व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

तेल कंपनियों को सीधे उपलब्ध होंगे डॉलर

RBI की नई व्यवस्था के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को नामित बैंकों के माध्यम से सीधे अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे। इन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है।

तेल कंपनियों की इस मांग के कारण खुले बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है। RBI की नई व्यवस्था का उद्देश्य तेल कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करते हुए खुले बाजार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।

96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई भारतीय मुद्रा

डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना हुआ है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भारतीय मुद्रा 96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई। यह मई में दर्ज 96.96 रुपये प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर के काफी करीब है।

रुपये में गिरावट के बीच RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने और डॉलर की अनावश्यक मांग को नियंत्रित करने के लिए ये कदम उठाए हैं।

करेंसी डेरिवेटिव्स की सीमा में बड़ी कटौती

विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए RBI ने करेंसी डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी है। यह सीमा रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स पर भी लागू होगी।

इसका उद्देश्य करेंसी डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल वास्तविक आयात-निर्यात संबंधी जोखिमों से बचाव के लिए सुनिश्चित करना है, ताकि अनावश्यक सट्टा गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया जा सके।

बड़े करेंसी सौदों पर 20% रिस्क रिजर्व अनिवार्य

RBI ने 20 लाख डॉलर से अधिक के सांकेतिक मूल्य वाले पात्र रुपये-संबंधी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों पर 20 प्रतिशत विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व (FERR) की अनिवार्यता भी लागू की है। इसके तहत अधिकृत डीलरों को संबंधित लेनदेन के रुपये मूल्य का 20 प्रतिशत नकद रिजर्व के रूप में रखना होगा।

इसके अलावा, करेंसी हेजिंग में दोहरे जोखिम से बचने के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया सख्त की गई है। डीलरों को ग्राहकों से यह वचन लेना होगा कि संबंधित जोखिम को किसी अन्य डीलर के माध्यम से पहले से हेज नहीं किया गया है।

लगातार चौथे सप्ताह घटा विदेशी मुद्रा भंडार

रुपये पर दबाव के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट दर्ज की गई है। 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 12.95 अरब डॉलर घटकर 734.60 अरब डॉलर रह गया। यह लगातार चौथा सप्ताह है, जब विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है।

RBI के इन उपायों से डॉलर की सट्टा मांग कम करने और रुपये को अल्पकालिक स्थिरता देने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, रुपये की आगे की चाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह और अमेरिकी डॉलर की मजबूती जैसे कारकों पर भी निर्भर करेगी।

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