PM मोदी से करीबी का झांसा देकर ठगी, आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से राहत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ फर्जी तस्वीरें दिखाकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोपी मोहम्मद काशिफ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब तीन साल से जेल में बंद काशिफ को सोमवार को सर्वोच्च अदालत ने जमानत दे दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी पलट दिया, जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी लंबे समय से हिरासत में है और कथित अपराध से जुड़ी राशि करीब 1.10 करोड़ रुपये बताई गई है। अदालत ने कड़ी शर्तों के साथ जमानत मंजूर की।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि वह भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल या दुरुपयोग नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी ट्रायल में सहयोग नहीं करता या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उसकी जमानत रद्द कराने के लिए निचली अदालत का रुख कर सकता है।

ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि मोहम्मद काशिफ ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ एडिटेड और फोटोशॉप की गई तस्वीरें पोस्ट की थीं। इन तस्वीरों के जरिए उसने लोगों के बीच अपनी ऊंची पहुंच का झूठा प्रभाव बनाया और सरकारी विभागों में काम कराने, नौकरी दिलाने तथा सरकारी ठेके दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की।

यह मामला अप्रैल 2023 में गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर थाने में दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया था। ईडी ने जांच के दौरान आरोपी के ठिकानों से 1.10 करोड़ रुपये बरामद करने का दावा किया था।

सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मूल धोखाधड़ी मामले में काशिफ को पहले ही जमानत मिल चुकी है और मनी लॉन्ड्रिंग केस के ट्रायल में देरी हो रही है। वहीं ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की धीमी गति और आरोपी द्वारा जेल में बिताए गए लंबे समय को आधार मानते हुए जमानत मंजूर कर ली।

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