आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों का सम्मान जरूरी : बदरुद्दीन कुरैशी

  • विश्व आदिवासी दिवस पर पूर्व राज्य मंत्री ने प्रदेश एवं देश-दुनिया के आदिवासी समाज को दी शुभकामनाएं

भिलाई। छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रदेश सहित देश और दुनिया के आदिवासी समाज को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली संघर्ष, समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति संरक्षण में उनके योगदान को नमन किया।

कुरैशी ने कहा कि आदिवासी समुदाय सदियों से जल, जंगल और जमीन के साथ जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान, भाषा और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। उनकी जीवनशैली प्रकृति के साथ संतुलन और सह-अस्तित्व का संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों, पहचान, संस्कृति और सम्मान के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना है। आज आवश्यकता है कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के अवसरों को और अधिक मजबूत किया जाए।

पूर्व राज्य मंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज की परंपरागत ज्ञान संपदा और विलुप्त होती भाषाओं के संरक्षण के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समानता, न्याय, सम्मान और अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का दिन है।

कुरैशी ने कहा कि सभी को मिलकर ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए, जहां आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों का सम्मान हो तथा विकास की मुख्यधारा में उनकी समान और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो।

उन्होंने आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और स्वाभिमान को सलाम करते हुए विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं।

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