अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की चार दिवसीय भारत यात्रा ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। इस यात्रा को क्वाड सहयोग को मजबूत करने और भारत को यह भरोसा दिलाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र को अब भी शीर्ष रणनीतिक महत्व देता है।
यह रुबियो की अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में भारत की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है। जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन के सीईओ डॉ. विवेक लाल ने इसे “सही समय पर हुई रणनीतिक बातचीत” बताया और कहा कि रक्षा, अंतरिक्ष और सैन्य सहयोग में दोनों देशों के बीच तेजी से प्रगति हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि क्वाड अब फिर से गति पकड़ रहा है और समुद्री निगरानी, सुरक्षा सहयोग और साझा ऑपरेशनल क्षमताएं इस साझेदारी को और मजबूत कर रही हैं।
यूएस इंडिया स्ट्रैटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष मुकेश आघी ने कहा कि इंडो-पैसिफिक अब अमेरिका की भू-राजनीतिक सोच का केंद्र बन चुका है। उनके अनुसार, क्वाड अब केवल कूटनीतिक मंच नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त काम शामिल है।
हडसन इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो अपर्णा पांडे ने इस यात्रा को प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के उच्चस्तरीय मंत्री की भारत यात्रा यह संकेत देती है कि भारत अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में मजबूती से बना हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका की यह पहल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, सहयोग और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।