डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

मुंबई। घरेलू और वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे की कमजोरी के साथ 94.36 प्रति डॉलर पर खुला। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता में सकारात्मक प्रगति के संकेतों ने रुपये को मजबूती देने का काम किया है।

पिछले कारोबारी सप्ताह में भारतीय मुद्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी और 94.32 के स्तर पर बंद हुई थी। यह पिछले तीन महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक मजबूती मानी जा रही है। लगातार छह कारोबारी सत्रों की तेजी के दौरान रुपया 94.18 के उच्च स्तर तक पहुंच गया, जिससे पिछले महीने दर्ज किए गए 97 के रिकॉर्ड निचले स्तर से उल्लेखनीय रिकवरी देखने को मिली।

कच्चे तेल में नरमी से मिली राहत

विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय रुपये के लिए सकारात्मक संकेत है। अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 1.7 प्रतिशत गिरकर 79.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में सकारात्मक प्रगति को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

ईरान की ओर से वार्ता को लेकर दिए गए सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों की उन चिंताओं को कम किया है, जो हाल के दिनों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई थीं।

विदेशी निवेश से मिल रहा समर्थन

विश्लेषकों के अनुसार भारतीय रुपया इस समय दो विपरीत परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा जमा में बढ़ोतरी भारतीय मुद्रा को मजबूती प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर मजबूत अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं दबाव बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी पूंजी प्रवाह जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो रुपये को आगे भी समर्थन मिलता रहेगा।

तकनीकी स्तरों पर नजर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपये के लिए 94.00 से 94.20 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 94.80 से 95.00 का स्तर निकट भविष्य में प्रमुख रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपये का रुख सकारात्मक बना हुआ है। यदि वैश्विक हालात अनुकूल रहे और विदेशी निवेश बढ़ता रहा, तो भारतीय मुद्रा आने वाले दिनों में 94.00 से 93.80 के स्तर तक भी मजबूत हो सकती है।

अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

रुपये की मजबूती से आयातित वस्तुओं की लागत कम हो सकती है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों और अन्य आयातित सामानों पर दबाव घटेगा। इससे महंगाई नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है। वहीं कमजोर डॉलर के मुकाबले मजबूत रुपया विदेशी कर्ज भुगतान और आयातक कंपनियों के लिए भी राहत भरा साबित हो सकता है।

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