नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान संसद मार्च में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह घटना केवल छात्रों के आक्रोश का नतीजा नहीं थी, बल्कि भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों और राजनीतिक दलों के कथित उकसावे का परिणाम हो सकती है। मामले में दर्ज एफआईआर में आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (SP) और भीम आर्मी का नाम सामने आया है।
सूत्रों के मुताबिक, संसद मार्ग थाने में दर्ज एक एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि संसद मार्च के दौरान सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़काई गई। मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच के लिए इसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दिया गया है। इससे पहले संसद मार्ग थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार इसकी जांच कर रहे थे।
हिंसा के पीछे साजिश की आशंका
पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में हिंसा से जुड़े कुल 21 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से एक एफआईआर इंस्पेक्टर इंद्रजीत की शिकायत पर दर्ज की गई है, जिसमें राजनीतिक दलों के इशारे पर हिंसा भड़काने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत 15 गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
दिल्ली पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, इंटरनेट मीडिया सामग्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए उपद्रवियों की पहचान कर रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेजों और वीडियो फुटेज से यह संकेत मिले हैं कि हिंसा के पीछे एक संगठित योजना और आपराधिक साजिश हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि 16 मई से लेकर 20 जुलाई तक विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया था, जिसके बाद भीड़ उग्र हो गई और पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया।
भीड़ को उकसाने के आरोप
एफआईआर के मुताबिक, 20 जुलाई को संसद मार्च के आह्वान पर हजारों लोग जंतर-मंतर पर जुटे थे। आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने लोगों को सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने और हिंसा फैलाने के लिए उकसाया, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास), 61 (आपराधिक साजिश), 191 (दंगा), 181 (गैरकानूनी सभा), 121 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकना), आर्म्स एक्ट की धारा 25 और दिल्ली पुलिस एक्ट समेत कई अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और जल्द ही संबंधित लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ की जा सकती है।