संसद में अगला बड़ा इम्तिहान परिसीमन बिल, क्या दो-तिहाई वोटों की चुनौती पार कर पाएगी सरकार?

नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र में एंटी पेपर लीक बिल और वंदे मातरम बिल पारित होने के बाद अब सभी की निगाहें महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार आगामी दिनों में इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश कर सकती है, लेकिन इन्हें पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। शुरुआती दिनों में पेपर लीक और जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही। हालांकि, दूसरे सप्ताह में सरकार ने एंटी पेपर लीक और वंदे मातरम बिल को सफलतापूर्वक पारित करा लिया।

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर टिकी निगाहें

संसद सत्र शुरू होने से पहले यह माना जा रहा था कि मोदी सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है। हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्ष के विरोध के चलते सरकार ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार इन विधेयकों को तभी संसद में पेश करेगी, जब उसे इनके पारित होने को लेकर पूरा भरोसा होगा।

क्यों जरूरी है दो-तिहाई बहुमत?

महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों ही विधेयकों को संविधान संशोधन के जरिए लागू किया जाना है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।

लोकसभा की 543 सीटों में फिलहाल तीन सीटें खाली हैं। ऐसे में 540 सदस्यों वाले सदन में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए कम से कम 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

सरकार के पास कितना समर्थन?

फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसद और शिवसेना (उद्धव गुट) से अलग हुए 6 सांसद भी सरकार के साथ माने जा रहे हैं। इस तरह सरकार के समर्थन में सांसदों की संख्या 319 तक पहुंचती है।

वाईएसआरसीपी के 4 सांसदों और एक निर्दलीय सांसद का समर्थन जोड़ने पर यह आंकड़ा 324 हो जाता है। इसके बावजूद सरकार अभी भी दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 360 सांसदों के आंकड़े से 36 सीटें दूर है।

किन दलों पर टिकी हैं सरकार की नजरें?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार की नजर डीएमके के 22 सांसदों और शरद पवार गुट की एनसीपी के 8 सांसदों पर है। हालांकि, हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और एंटी पेपर लीक बिल को लेकर विपक्ष के आक्रामक रुख को देखते हुए इन दलों का समर्थन मिलना आसान नहीं माना जा रहा है।

फिलहाल सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। माना जा रहा है कि सरकार तभी इन विधेयकों को संसद में पेश करेगी, जब उसे दो-तिहाई बहुमत का पूरा भरोसा होगा।

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