हेल्थ न्यूज। डायबिटीज के मरीजों के लिए पैर में होने वाली छोटी-सी खरोंच या छाला भी गंभीर समस्या बन सकता है। कई बार घाव में संक्रमण बढ़ने पर पैर या उंगलियां काटने तक की नौबत आ जाती है। अब वैज्ञानिक शोध में ऐसे जैविक तंत्र पर ध्यान दिया गया है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाएं लंबे समय तक सूजन की स्थिति में बनी रह सकती हैं और घाव भरने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
इम्यून सेल्स की भूमिका पर नई खोज
डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है और पैरों में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इससे चोट का पता देर से चलता है और घाव भरने में अधिक समय लग सकता है।
शोध में मैक्रोफेज नामक प्रतिरक्षा कोशिकाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सामान्य रूप से ये कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने और बाद में ऊतकों की मरम्मत में मदद करती हैं। लेकिन डायबिटीज से जुड़े घावों में सूजन लंबे समय तक बनी रह सकती है, जिससे स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचने और घाव भरने में देरी होने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या है रीप्रोग्रामिंग थेरेपी?
वैज्ञानिक ऐसी उपचार पद्धतियों पर काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित करके घाव भरने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। इसे इम्यून सेल रीप्रोग्रामिंग कहा जाता है। भविष्य में ऐसी तकनीकें डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
हालांकि, इस तरह की नई उपचार पद्धतियों की प्रभावशीलता और सुरक्षा की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी हैं। इन्हें फिलहाल स्थापित इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
डायबिटीज के मरीज इन बातों का रखें ध्यान
- रोजाना पैरों और तलवों की जांच करें। लालिमा, छाला, कट या सूजन को नजरअंदाज न करें।
- घर के अंदर भी नंगे पैर चलने से बचें और आरामदायक, सही आकार के जूते पहनें।
- ब्लड शुगर को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियंत्रित रखें।
- पैरों में घाव होने पर खुद से उसे काटने, छीलने या घरेलू रसायन लगाने से बचें।
- घाव, संक्रमण या त्वचा के रंग में बदलाव दिखने पर जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। पैर काला पड़ने, तेज सूजन, बुखार या पस आने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
डायबिटीज में पैरों की नियमित देखभाल और समय पर उपचार गंभीर संक्रमण तथा अंग काटने के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।