सुप्रीम कोर्ट से देवेंद्र यादव को झटका, भिलाई नगर चुनाव याचिका का अब हाईकोर्ट में होगा ट्रायल

बिलासपुर/नई दिल्ली, 25 अगस्त। भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़े निर्वाचन विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने विधायक देवेंद्र यादव को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 30 जून 2026 के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए देवेंद्र यादव की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। इसके साथ ही अब प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से दायर निर्वाचन याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है।

2023 के चुनाव से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भिलाई नगर सीट से देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली निर्वाचन याचिका क्रमांक 9/2024 से जुड़ा है। पूर्व मंत्री एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में नामांकन के दौरान दाखिल शपथ-पत्र में आवश्यक जानकारी के खुलासे सहित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

हाईकोर्ट में तय हुए थे पांच मुद्दे

निर्वाचन याचिका पर सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2024 को पांच मुद्दे तय किए थे। इनमें कुछ मुद्दे नामांकन शपथ-पत्र में आवश्यक जानकारी दिए जाने तथा निर्वाचन याचिका की वैधानिकता से संबंधित थे।

देवेंद्र यादव की ओर से बाद में हाईकोर्ट में आवेदन देकर मुद्दा क्रमांक 2 और 4 को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करने की मांग की गई थी। उनका तर्क था कि इन मुद्दों पर प्रारंभिक स्तर पर निर्णय हो जाने से मामले में साक्ष्य दर्ज करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और चुनाव याचिका का निपटारा किया जा सकता है।

30 जून को हाईकोर्ट ने आवेदन किया खारिज

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को देवेंद्र यादव की इस मांग को खारिज कर दिया। न्यायालय ने माना कि संबंधित मुद्दे केवल कानून के प्रश्न नहीं हैं, बल्कि उनमें तथ्य और कानून दोनों जुड़े हुए हैं। आरोप सही हैं या नहीं, कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं तथा कथित आचरण का चुनाव परिणाम पर कोई प्रभाव पड़ा या नहीं—इन प्रश्नों का निर्णय साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में SLP (Civil) No. 28778/2026 दाखिल की। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष हुई।

दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने की पैरवी

सुप्रीम कोर्ट में देवेंद्र यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पक्ष रखा, जबकि प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने पैरवी की। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निर्वाचन याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली थी राहत

यह पहली बार नहीं है जब देवेंद्र यादव को इस निर्वाचन विवाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। इससे पहले उन्होंने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी ओर से आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत निर्वाचन याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने SLP (Civil) No. 6306/2025 को 24 फरवरी 2026 को खारिज कर दिया था।

अब सीधे साक्ष्यों की होगी परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब चुनाव विवाद का केंद्र हाईकोर्ट में होने वाला नियमित ट्रायल होगा। इसमें दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य पेश करेंगे और गवाहों से जिरह सहित अन्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही निर्वाचन याचिका में लगाए गए आरोपों और बचाव का न्यायिक परीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि ऐसे तथ्यात्मक एवं कानूनी प्रश्नों का निर्णय साक्ष्य के आधार पर ही किया जा सकता है।

राजनीतिक प्रभाव पर भी नजर

इस मामले का संभावित प्रभाव भिलाई नगर विधानसभा के निर्वाचन परिणाम पर पड़ सकता है, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि निर्वाचन रद्द होगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का 25 अगस्त का आदेश चुनाव विवाद का अंतिम फैसला नहीं है; उसने केवल हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया है, जिसके तहत मामले को नियमित ट्रायल और साक्ष्य की प्रक्रिया से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।अगला चरण अब हाईकोर्ट में साक्ष्य और सुनवाई का होगा।

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