नारी डेस्क: सीताफल, जिसे शरीफ़ा या Custard Apple भी कहा जाता है, एक ऐसा फल है जो स्वाद में जितना लाजवाब है, सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद भी है। इसकी मलाई जैसी बनावट, मीठा स्वाद और पौष्टिक तत्व इसे सर्दियों का पसंदीदा फल बना देते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठते हैं — क्या शरीफ़ा ठंडा फल है? क्या रोज खाया जा सकता है? क्या इससे वजन बढ़ता है या कब्ज़ होती है? आइए जानते हैं सीताफल से जुड़े हर सवाल का आसान जवाब।
शरीफ़ा क्या होता है?
शरीफ़ा गोल आकार का हल्का हरा फल होता है, जिसकी सतह पर छोटे-छोटे उभार होते हैं। अंदर सफेद मलाईदार गूदा और काले बीज पाए जाते हैं। इसमें विटामिन C, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और मजबूती देते हैं।
शरीफ़ा कब मिलता है?
इसका मौसम सितंबर से दिसंबर तक रहता है। यह बरसात के बाद और सर्दियों की शुरुआत में सबसे ज्यादा स्वादिष्ट और पोषक होता है। इस समय इसका गूदा मुलायम और मीठा होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।
शरीफ़ा खाने के प्रमुख फायदे
- ऊर्जा बढ़ाता है – शरीफ़ा में प्राकृतिक शर्करा होती है जो थकान मिटाकर तुरंत एनर्जी देती है।
- पाचन सुधारता है – फाइबर से भरपूर होने के कारण यह कब्ज़ दूर करता है और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।
- त्वचा में निखार लाता है – विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को ग्लोइंग बनाते हैं।
- बालों को मज़बूती देता है – इसमें मौजूद आयरन और विटामिन्स बालों की जड़ों को पोषण देते हैं।
- दिल को स्वस्थ रखता है – मिनरल्स और फाइबर हृदय रोगों के खतरे को कम करते हैं।
- ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है – पोटैशियम और मैग्नीशियम रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
- नींद में मददगार – मैग्नीशियम दिमाग को शांत कर नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाता है।
- खून बढ़ाता है – विटामिन C और आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाते हैं।
- इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है – यह शरीर को संक्रमणों से बचाने की क्षमता बढ़ाता है।
- वजन प्रबंधन में मददगार – सीमित मात्रा में सेवन करने से यह शरीर को फिट और ऊर्जावान रखता है।
शरीफ़ा की तासीर – ठंडी या गरम?
आयुर्वेद के अनुसार, शरीफ़ा ठंडी तासीर वाला फल है। यह शरीर की गर्मी को कम करता है और एसिडिटी या जलन जैसी समस्याओं से राहत देता है। सर्दियों में इसे दिन के समय खाना अधिक उचित माना जाता है ताकि ठंड के प्रभाव से बचा जा सके।
शरीफ़ा खाने का सही समय
- शरीफ़ा खाने का सबसे अच्छा समय दोपहर के बाद का होता है।
- सुबह खाली पेट या रात में इसे खाने से बचें, क्योंकि यह पाचन को धीमा कर सकता है।
- दिन में खाने पर यह शरीर को ऊर्जा देता है और पाचन भी सुचारू रहता है।
क्या शरीफ़ा खाने से वजन बढ़ता है?
- शरीफ़ा में प्राकृतिक शुगर और कैलोरी दोनों ही अधिक होती हैं। अगर इसे रोज़ाना या ज़्यादा मात्रा में खाया जाए तो वजन बढ़ सकता है।
- लेकिन अगर आप हफ्ते में 2–3 बार एक फल खाते हैं, तो यह ऊर्जा देने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है।
क्या शरीफ़ा से कब्ज़ होती है?
बिलकुल नहीं! शरीफ़ा में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज़ को दूर करता है।
हाँ, अगर इसे बहुत ज़्यादा मात्रा में खाया जाए तो पेट में भारीपन या गैस हो सकती है। इसलिए सीमित मात्रा में सेवन ही फायदेमंद है।
क्या डायबिटीज़ के मरीज शरीफ़ा खा सकते हैं?
शरीफ़ा में प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए डायबिटीज़ के मरीजों को बहुत सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।
एक छोटा हिस्सा हफ्ते में एक-दो बार लेना सुरक्षित माना जाता है, पर डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
शरीफ़ा कैसे खाएं?
- इसे पका हुआ होने पर काटकर चम्मच से गूदा निकालकर खाएं।
- ठंडा करके खाने से स्वाद और बढ़ जाता है।
इसे मिल्कशेक, स्मूदी या आइसक्रीम में भी शामिल किया जा सकता है।
बीज कभी न खाएं, क्योंकि ये पचते नहीं हैं और आंतों में जलन पैदा कर सकते हैं।
शरीफ़ा के नुकसान
ज़्यादा खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
ठंडी तासीर के कारण सर्दी या गले की खराश हो सकती है।
कुछ लोगों को पाचन में भारीपन महसूस हो सकता है।