होर्मुज पर हलचल, उधर चीन ने समुद्र में नया प्रतिबंध लगाया

बीजिंग/वॉशिंगटन: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नई हलचल तेज हो गई है। एक तरफ मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं, वहीं दूसरी ओर चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी पकड़ मजबूत करने में तेजी दिखा रहा है।

ताजा घटनाक्रम में चीन ने स्कारबोरो शोल के आसपास अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। यह इलाका लंबे समय से फिलीपींस और चीन के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। उपग्रह तस्वीरों और रिपोर्टों के मुताबिक, चीन ने इस क्षेत्र में कई जहाजों की तैनाती बढ़ाई है और समुद्री पहुंच को सीमित करने के प्रयास किए हैं।

बताया जा रहा है कि इस इलाके में चीनी कोस्ट गार्ड और मछली पकड़ने वाले जहाजों की मौजूदगी बढ़ी है। इसके साथ ही एक बड़े अस्थायी अवरोध (फ्लोटिंग बैरियर) के जरिए क्षेत्र में आने-जाने पर निगरानी कड़ी की जा रही है। यह कदम फिलीपींस के लिए चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि उसके मछुआरे वर्षों से इस क्षेत्र में निर्भर रहे हैं।

फिलीपींस का आरोप है कि चीन समुद्री मिलिशिया जैसी रणनीति अपनाकर धीरे-धीरे क्षेत्र पर अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है और स्थानीय मछुआरों को पीछे धकेल रहा है। जवाब में फिलीपींस ने भी अपने समुद्री बलों की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी अहम होती जा रही है। वह पहले से ही फिलीपींस का सहयोगी रहा है और हाल के दिनों में दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह विवाद अब क्षेत्रीय दायरे से निकलकर बड़े रणनीतिक टकराव का रूप ले सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का फायदा उठाकर दक्षिण चीन सागर में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व की ओर अधिक केंद्रित है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि स्कारबोरो शोल पर चीन पिछले एक दशक से प्रभाव बनाए हुए है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विवाद पर फैसले भी आ चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कुल मिलाकर, एक ओर जहां मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं एशिया में समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय संतुलन पर भी दबाव बढ़ता दिख रहा है, जो वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *