रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में दूरस्थ गांवों तक सरकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं को पहुंचाने की पहल ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने इस परियोजना को ‘स्टेट कोलैबोरेशन इनिशिएटिव’ के तहत देश के 14 चयनित प्रस्तावों में शामिल किया है। इसके लिए 1.17 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी भी दी गई है।
इस परियोजना के माध्यम से सुकमा के अंदरूनी और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने की योजना है। इसके तहत मोबाइल सेवा वैन और 24 घंटे संचालित होने वाला बहुभाषी कॉल सेंटर शुरू किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को जरूरी दस्तावेज बनवाने और सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने के लिए बार-बार दूर के कार्यालयों तक जाने की जरूरत कम होगी।
पहले चरण में हजारों लोगों को मिला लाभ
सुकमा में मार्च 2026 से केंद्रीकृत निगरानी एवं नियंत्रण केंद्र (सीएमसीसी 1.0) संचालित किया जा रहा है। इसके माध्यम से अब तक 40 हजार से अधिक फोन कॉल किए जा चुके हैं। इस पहल के जरिए नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं से जोड़ने का काम किया गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 10,078 आयुष्मान कार्ड और 11,103 नए मतदाता पहचान पत्र बनाए गए हैं। इसके अलावा 5,788 आधार नामांकन और 27,391 बायोमेट्रिक अपडेट किए गए हैं।
आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 452 महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है। इनके माध्यम से 4,745 परिवारों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है। अब इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ के रूप में सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
स्थानीय बोलियों में मिलेगी 24 घंटे सहायता
सुकमा जैसे दूरस्थ और आदिवासी बहुल जिले में भाषा और दूरी के कारण कई बार लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है। इसे ध्यान में रखते हुए परियोजना के तहत स्थानीय बोलियों में सहायता देने वाला कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा।
यह कॉल सेंटर चौबीसों घंटे काम करेगा। वहीं, दो मोबाइल सेवा वैन दूरस्थ गांवों तक पहुंचेंगी और आधार सहित अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगी। इससे ग्रामीणों का समय और आने-जाने का खर्च बचाने में सहायता मिलेगी।
198 स्कूलों और आश्रमों की होगी डिजिटल निगरानी
‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया है। परियोजना के तहत जिले के 198 आवासीय विद्यालयों और आश्रमों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू करने की योजना है।
इसके साथ ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान करने और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे ऐसे बच्चों को चिह्नित करने में मदद मिलेगी, जो किसी कारण से पढ़ाई से दूर हो गए हैं।
कलेक्टर स्तर पर बनेगा डिजिटल डैशबोर्ड
परियोजना के अंतर्गत सरकारी योजनाओं, नागरिक सेवाओं और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी के लिए कलेक्टर स्तर पर डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा। इसके जरिए विभिन्न योजनाओं की प्रगति और लोगों तक सेवाओं की पहुंच का एक ही मंच से आकलन किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था से प्रशासन को समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दूरस्थ गांवों तक सेवाएं पहुंचाने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ को तकनीक और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
जिले में कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में सीएमसीसी 1.0 का संचालन किया जा रहा है। अब नई परियोजना के माध्यम से नागरिक सेवाओं, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की तैयारी है।
राष्ट्रीय स्तर पर चयन और वित्तीय मंजूरी मिलने से सुकमा की इस पहल को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाएं उनके करीब उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।