नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बार फिर हालात गंभीर हो गए हैं। अमेरिकी सैन्य बल यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमला किया, जिसे पिछले महीने हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया गया है।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सैन्य अभियान के दौरान ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी केंद्र, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया गया। दक्षिणी ईरान के सिरीक और बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक बंदरगाह क्षेत्रों में कई तेज धमाकों की खबरें सामने आई हैं।
वहीं, ईरान ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन किया है और ईरान अपने राष्ट्रीय हितों तथा सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक हर कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।