कैंसर के खिलाफ लड़ाई हुई महंगी, दवाओं के दाम बढ़ने से बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली। कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली कुछ महत्वपूर्ण दवाओं की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। यह फैसला बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल, विशेषकर प्लैटिनम, की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल को देखते हुए लिया गया है।

एनपीपीए के आदेश के अनुसार, कार्बोप्लाटिन (Carboplatin) इंजेक्शन की कीमत ₹60.49 प्रति मिलीलीटर से बढ़ाकर ₹90.74 प्रति मिलीलीटर कर दी गई है। वहीं सिस्प्लाटिन (Cisplatin) इंजेक्शन की कीमत ₹7.26 प्रति मिलीलीटर से बढ़कर ₹10.89 प्रति मिलीलीटर हो गई है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी सभी कैंसर रोधी दवाओं पर लागू नहीं होगी, बल्कि मुख्य रूप से प्लैटिनम आधारित दवाओं पर असर पड़ेगा। इन दवाओं का उपयोग ओवेरियन, फेफड़े, मूत्राशय (ब्लैडर) और टेस्टिकुलर कैंसर समेत कई प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है।

एनपीपीए के मुताबिक, प्लैटिनम की वैश्विक कीमतों में लगातार वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चुनौतियों के कारण दवा निर्माताओं की लागत काफी बढ़ गई है। कई कंपनियों ने उत्पादन प्रभावित होने और बाजार में दवाओं की कमी की आशंका जताई थी।

सरकार का कहना है कि आवश्यक कैंसर रोधी दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने और मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) के पैरा-19 के तहत विशेष अनुमति देकर कीमतों में संशोधन किया गया है।

हालांकि, इस फैसले से कैंसर मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है, क्योंकि उपचार के दौरान इन दवाओं की जरूरत लंबे समय तक पड़ सकती है। सरकार का तर्क है कि कीमतों में वृद्धि का उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना और बाजार में उनकी कमी को रोकना है।

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