गांव-गांव जान बचाने वाली मितानिनों का फूटा दर्द,दुर्ग में 1400 मितानिनें बैठीं धरने पर,सरकार को याद दिलाया 50% मानदेय वृद्धि का चुनावी वादा

दुर्ग |गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों की जान बचाने वाली तथा स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिनें आज खुद अपने हक और न्याय के लिए गुहार लगाने को मजबूर हैं। दुर्ग जिला मुख्यालय के मानस भवन के पास आज सैकड़ों मितानिनों का दर्द सड़कों पर दिखाई दिया। अपनी लंबित मांगों को लेकर दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत करीब 1400 मितानिनों ने एक दिवसीय जंगी धरना प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार को उसके चुनावी वादों की याद दिलाई।

सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया चुनावी वादाधरने पर बैठी आंदोलनकारी मितानिनों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से बेहद कम मानदेय में चौबीसों घंटे ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। कोरोना काल से लेकर सामान्य दिनों तक उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया, लेकिन उनके भविष्य और परिवार की चिंता न तो शासन ने की और न ही प्रशासन ने।

 मितानिनों ने प्रदेश सरकार को उसके चुनावी घोषणा पत्र की याद दिलाते हुए कहा कि चुनाव के समय उनसे मानदेय में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद भी यह वादा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है।बढ़ती महंगाई में दम तोड़ रहा है मितानिनों का बजटप्रदर्शनकारी मितानिन बहनों ने कहा कि आज के दौर में जब महंगाई सातवें आसमान पर है, इतने कम मानदेय में पूरे परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों को पढ़ाना नामुमकिन हो गया है।

सरकार की अनदेखी के कारण आज मितानिनों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा तीन सूत्रीय ज्ञापनसभागार के पास घंटो चले पुरजोर धरने और नारेबाजी के बाद मितानिनों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम तीन सूत्री मांगों को लेकर दुर्ग जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

मितानिन संघ ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार उनके वादों को जल्द पूरा करे और उनके मानदेय को लेकर तत्काल कोई सार्थक और ठोस निर्णय ले, अन्यथा आने वाले समय में वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगी।

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