नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को संसद में पेश करने को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि केंद्र सरकार इन विधेयकों पर आगे बढ़ने के लिए दिवाली से पहले संसद की बैठक बुलाने के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि, संसद का विशेष सत्र बुलाने या विधेयकों को पेश करने की तारीख को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
मानसून सत्र के अगले चरण पर नजर
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर संसद के विशेष सत्र की संभावना पर चर्चा हो रही है। इसके साथ ही मानसून सत्र के अगले चरण में संसद की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प भी सामने है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन विधेयकों को किस सत्र में पेश करने का फैसला करती है।
संसद के शीतकालीन सत्र के नवंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू होने की संभावना के बीच दिवाली से पहले दो से तीन दिनों की बैठक बुलाए जाने की चर्चा भी है। हालांकि, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है।
दो-तिहाई बहुमत जुटाना अहम
महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाना सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा के मुताबिक, सरकार विधेयकों पर आगे बढ़ने से पहले आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के साथ अतिरिक्त सांसदों का समर्थन सुनिश्चित करना चाहती है।
ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति और समर्थन का गणित विधेयकों को पेश करने की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। जरूरी समर्थन मिलने के बाद ही सरकार इनके संबंध में आगे का कदम तय कर सकती है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन्हें संसद में पेश करने और पारित कराने के लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन करना होगा।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार दिवाली से पहले संसद की बैठक बुलाएगी या इन विधेयकों को शीतकालीन सत्र तक टाला जाएगा। संसद की अगली बैठक और विधेयकों को पेश करने की तारीख को लेकर स्थिति सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।