वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि यदि ईरान ने अपना रवैया नहीं बदला तो अमेरिका उस पर दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा।
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौता कोई अंतिम फैसला नहीं, बल्कि केवल एक शुरुआती समझौता (MoU) है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समझौता अमेरिका की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा या ईरान ने सही व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान पिछले कई दशकों से गलत नीतियों पर चल रहा है और अब इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फ्रांस में आयोजित जी-7 सम्मेलन में पहुंचने के बाद ट्रंप लगातार ईरान को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दुनिया को एक संभावित आर्थिक संकट और गंभीर मंदी से बचाया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किन लोगों की आलोचना कर रहे थे, जिन्हें उन्होंने “मूर्ख” बताया।
इस बीच ट्रंप ने वैश्विक तेल आपूर्ति से जुड़े सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक मार्ग आंशिक रूप से खोल दिया गया है और अगले एक-दो दिनों में पूरी तरह जहाजों की आवाजाही के लिए बहाल हो सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ट्रंप के सख्त बयान के बाद अब पूरी दुनिया की निगाहें स्विट्जरलैंड में होने वाले अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकी हैं। कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि इस बयानबाजी का समझौते और दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा।